जयपुर। सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर सात दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेशभर के पदाधिकारियों की बैठक के बाद शनिवार से पूरे राजस्थान में संपूर्ण कार्य बहिष्कार (झाड़ू डाउन हड़ताल) का ऐलान किया गया। इसके चलते प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रहेगी। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण भी बंद रहेगा। वहीं निजी कंपनियों और घरों में कार्यरत वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारी भी सफाई कार्य का बहिष्कार करेंगे।
संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने कहा कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द नई सफाई कर्मचारी भर्ती की विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए तथा भर्ती प्रक्रिया में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने के संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं। मांगें पूरी नहीं होने तक प्रदेशभर में सफाई कार्य ठप रहेगा।

2018 की भर्ती पर भी उठाए सवाल
आंदोलनरत कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2018 में विभिन्न वर्गों के लोगों को सफाई कर्मचारी पदों पर नियुक्त किया गया, लेकिन उनमें से कई कर्मचारी वास्तविक सफाई कार्य करने के बजाय कार्यालयों में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यदि नियुक्त कर्मचारी मैदान में उतरकर पूरी जिम्मेदारी से सफाई करें तो वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने की मांग उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन ने पूर्व में हुए समझौतों को लागू नहीं किया, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
व्यापारियों ने बताया अनुचित, आवश्यक सेवा घोषित करने की मांग
उधर, शहर के व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों ने हड़ताल को अनुचित बताते हुए सफाई को आवश्यक सेवा (एसेंशियल सर्विस) घोषित करने की मांग उठाई है।
त्रिपोलिया बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की बार-बार होने वाली हड़ताल उचित नहीं है। सफाई सीधे आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ी सेवा है। जिस प्रकार पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं को आवश्यक सेवा माना जाता है, उसी प्रकार सफाई को भी आवश्यक सेवा घोषित किया जाना चाहिए, ताकि शहर को बार-बार ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
शहरवासी हनुमान सिंह ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से पूरा शहर गंदगी की चपेट में आ जाता है। जयपुर देश-विदेश के पर्यटकों की पसंदीदा पर्यटन नगरी है। यदि पर्यटक गंदगी देखेंगे तो इससे शहर की छवि प्रभावित होगी। उन्होंने कर्मचारियों से मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाने की अपील की।
जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने कहा कि सफाई एक आवश्यक सेवा है। यदि एक दिन घर में झाड़ू नहीं लगे तो गंदगी फैल जाती है, ऐसे में पूरे शहर की सफाई का महत्व सहज समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी परिस्थितियां बनने से रोकना चाहिए, जिनमें कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़े। साथ ही सफाई कर्मचारियों से भी जयपुर की पर्यटन और व्यापारिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की।
प्रदेशभर में पड़ सकता है व्यापक असर
शनिवार से शुरू हो रही झाड़ू डाउन हड़ताल का असर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में देखने को मिल सकता है। सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में सफाई कार्य बंद रहने तथा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण रुकने से कुछ ही दिनों में गंदगी बढ़ने की आशंका है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर आमजन के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यटन और व्यापार पर भी पड़ेगा।



















