श्री राम कथा: दक्ष यज्ञ प्रसंग से मिला अहंकार त्याग और सत्कर्म का संदेश

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जयपुर। मुरलीपुरा के विकास नगर स्थित शिव हनुमान मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास मनोज कृष्ण महाराज ने दक्ष यज्ञ, शिव-सती प्रसंग और सती के देह त्याग का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में अहंकार का त्याग करने और सत्कर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

कथा व्यास ने राजा दक्ष के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि अभिमान मनुष्य के विनाश का सबसे बड़ा कारण बनता है। राजा दक्ष ने अपने पद और प्रतिष्ठा के अहंकार में आकर भगवान शिव का अपमान किया, जिसका दुष्परिणाम पूरे यज्ञ के विध्वंस के रूप में सामने आया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को सचेत करते हुए कहा कि “आज का इंसान घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय व्यतीत कर देता है। यदि वही कीमती समय भगवान के नाम-स्मरण, भजन और सत्संग में लगाया जाए, तो जीवन का कल्याण निश्चित है।”

मनोज कृष्ण महाराज ने कर्मों की प्रधानता पर जोर देते हुए कहा कि ईश्वर हर पल हमारे कर्मों को देख रहे हैं, इसलिए मनुष्य को कभी भी गलत कार्यों में लिप्त नहीं होना चाहिए। भगवान की अदालत में किसी व्यक्ति का धन, पद या सामाजिक प्रतिष्ठा काम नहीं आती, बल्कि वहाँ केवल और केवल उसके कर्मों के आधार पर ही न्याय होता है।

उन्होंने शरीर की नश्वरता को समझाते हुए कहा कि यह भौतिक शरीर केवल एक लिफाफे के समान है, जिसे एक दिन मिट्टी में मिल जाना है। इसलिए बाहरी रूप-रंग की अपेक्षा भीतर स्थित आत्मा को भक्ति, ज्ञान, सेवा और सत्कर्मों से परिष्कृत करना ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

कथा के शुभारंभ में मुख्य यजमान बाबूलाल अग्रवाल, गोविंद शर्मा एवं पंडित सीताराम शर्मा (बबाई वाले) ने व्यासपीठ का पूजन कर आरती उतारी। कथा के दौरान बीच-बीच में गाए गए सुमधुर भजनों और भगवान श्रीराम के गगनभेदी जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने उपस्थित रहकर धर्म लाभ उठाया।

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