फर्जी वसीयत से करोड़ों की जमीन हड़पकर 1.40 करोड़ में बेचने वाला पांच साल बाद गिरफ्तार

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जयपुर। फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपए की जमीन हड़पने और उसे 1.40 करोड़ रुपए में बेचने के मामले में पांच साल से फरार चल रहे आरोपी को मुहाना थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी वसीयत के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया और इसके बाद जमीन का विक्रय विलेख कर दिया। पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी को गिरफ्तार किया।

पुलिस उपायुक्त दक्षिण राजर्षि राज ने बताया कि मुहाना थाना पुलिस ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपए की जमीन हड़पने और उसे 1.40 करोड़ रुपए में बेचने के मामले में पांच साल से फरार चल रहे आरोपी कमल व्यास (34) निवासी पत्रकार कॉलोनी जयपुर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कमल व्यास के खिलाफ पहले से भी धोखाधड़ी, मारपीट और अन्य धाराओं में कई मामले दर्ज हैं।

मुहाना थानाधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि मामला वर्ष 2021 का है। परिवादी सूरजमल ने 12 सितंबर 2021 को मुहाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि ग्राम मोहनपुरा, तहसील सांगानेर में खसरा कुल किता 16 की 12.2100 हेक्टेयर कृषि भूमि में परिवादी और सहकृषकों का हक था।

इसमें स्वर्गीय बद्रीनारायण के एक-पांचवें हिस्से का पंजीकृत हकत्याग पत्र 22 अप्रैल 2021 को परिवादी के पक्ष में हो चुका था। पुलिस के अनुसार बद्रीनारायण की 2 मई 2021 को मृत्यु के बाद आरोपी कमल व्यास (34) पुत्र गोपाल लाल व्यास, निवासी ब्राह्मणों की ढाणी, मोहनपुरा ने कथित रूप से साजिश रचकर कूटरचित वसीयत तैयार करवाई। इसके आधार पर 28 जुलाई 2021 को नामांतरण संख्या 436 के जरिए राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा लिया।

राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद आरोपी ने 19 अगस्त 2021 को 0.5058 हेक्टेयर भूमि का विक्रय विलेख 1.40 करोड़ रुपए में मनीष व्यास, निवासी झालावाड़, के पक्ष में निष्पादित कर दिया। शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामला संख्या 879/2021 दर्ज कर जांच शुरू की थी। आरोपी लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था।

इसके बाद से ही वांछित आरोपी की तलाश में पुलिस टीम ने तकनीकी अनुसंधान के साथ मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। आरोपी के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाकर दबिश दी गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है तथा जमीन संबंधी फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और दस्तावेजों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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