एसएमएस के सर्जनों का कमाल: दो जटिल ऑपरेशन कर बचाईं जिंदगियां

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जयपुर। सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग ने दो जटिल और दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक कर मरीजों को नया जीवन दिया। एक मामले में चिकित्सकों ने अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) तकनीक से दाहिनी ओर के दुर्लभ डायफ्रामेटिक हर्निया का सफल ऑपरेशन किया। जबकि दूसरे मामले में 18 वर्षीय युवती के दोनों स्तनों से कुल 15 गांठें सुरक्षित निकालकर उसे राहत दी।

जानकारी के अनुसार सीकर निवासी एक महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर एसएमएस अस्पताल पहुंची थी। जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सक डॉ. अमित जैन को जांच के दौरान सामान्य पेट दर्द से अलग गंभीर बीमारी की आशंका हुई। विस्तृत रेडियोलॉजिकल जांच में पता चला कि महिला दाहिनी ओर के दुर्लभ डायफ्रामेटिक हर्निया (राइट डायफ्रामेटिक हर्निया) से पीड़ित है।

जांच में सामने आया कि मरीज के डायफ्राम में करीब 6×5 सेंटीमीटर का छेद था, जिसके कारण दाहिनी किडनी, ट्रांसवर्स कोलन (बड़ी आंत का हिस्सा) और लिवर का एक भाग अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर छाती में पहुंच गए थे। चिकित्सकों के अनुसार दाहिनी ओर का डायफ्रामेटिक हर्निया स्वयं में अत्यंत दुर्लभ होता है और उसमें एक साथ इतने महत्वपूर्ण अंगों का छाती में पहुंच जाना और भी जटिल स्थिति मानी जाती है।

डॉ. अमित जैन ने बताया कि यदि समय रहते बीमारी का पता नहीं चलता तो मरीज को आंत के फंसने, रक्त प्रवाह रुकने, आंत फटने, गंभीर संक्रमण और श्वसन संबंधी जटिलताओं जैसी जानलेवा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था।

डॉ. प्रभा ओम के मार्गदर्शन में डॉ. अमित जैन एवं उनकी टीम ने अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से छोटे-छोटे चीरों के माध्यम से ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान छाती में पहुंचे सभी अंगों को सावधानीपूर्वक उनकी सामान्य स्थिति में स्थापित किया गया। चिकित्सकों का कहना है कि इतनी जटिल स्थिति में पूरी सर्जरी को लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक करना बड़ी तकनीकी उपलब्धि है।

इस सर्जरी में डॉ. प्रवीण जोशी, डॉ. रजत शर्मा, डॉ. हर्षिता, डॉ. तरुण, डॉ. दीपक, डॉ. मनीष, डॉ. सृष्टि, डॉ. दीर्घायु और डॉ. ऋत्विक शामिल रहे। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. कंचन और डॉ. सुशील भाटी ने संभाली, जबकि नर्सिंग टीम में यूनुस और दीपा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

वहीं एक अन्य मामले में जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने टोंक जिले की 18 वर्षीय युवती के दोनों स्तनों से कुल 15 गांठें सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी। इनमें एक स्तन से 7 और दूसरे से 8 गांठें निकाली गईं।

डॉ. मोहित जैन ने बताया कि सामान्यतः स्तनों में एक या दो गांठें ही देखने को मिलती हैं, जबकि दोनों स्तनों में एक साथ इतनी अधिक संख्या में गांठों का होना अत्यंत दुर्लभ स्थिति है। युवती लंबे समय से इन गांठों को नजरअंदाज कर रही थी, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या बढ़ने पर उसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की आशंका होने लगी।

एसएमएस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत जांच और आवश्यक परीक्षण किए, जिनमें सभी गांठें सामान्य (Benign) प्रकृति की पाई गईं। हालांकि उनकी संख्या अधिक होने और भविष्य में संभावित परेशानी को देखते हुए ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

चिकित्सकों ने दोनों स्तनों में छोटे-छोटे चीरे लगाकर सभी 15 गांठों को सुरक्षित निकाल दिया। वर्तमान में युवती पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी स्थिति स्थिर बताई गई है।
एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने कहा कि दोनों जटिल सर्जरियों की सफलता जनरल सर्जरी विभाग की उन्नत लेप्रोस्कोपिक तकनीक और दुर्लभ एवं जटिल बीमारियों के उपचार में विशेषज्ञता का प्रमाण है।

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