जयपुर। गुलाबी नगरी में पुरी की तर्ज पर आयोजित भगवान जगन्नाथ की परंपरागत रथयात्रा का प्रथम चरण श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रहों को गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) पहुंचाया गया, जहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद तीनों देव विग्रहों को रथों पर विराजमान कर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया। भगवान के आगमन पर पूरा परिसर ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष और पुष्पवर्षा से गूंज उठा।
पुरी की धार्मिक परंपरा के अनुरूप भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अब अगले एक सप्ताह तक गुंडिचा मंदिर में प्रवास करेंगे। इस दौरान प्रतिदिन प्रातःकाल विशेष मंगला आरती, भगवान का भव्य श्रृंगार और राजभोग अर्पित किया जाएगा। शाम को संध्या आरती, भजन-कीर्तन तथा श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद वितरण का आयोजन होगा।
आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार एक सप्ताह के प्रवास के बाद निर्धारित तिथि पर ‘बहुदा यात्रा’ के माध्यम से भगवान जगन्नाथ अपने मूल मंदिर लौटेंगे। जयपुर के कई प्रमुख मंदिरों में वर्षों से पुरी की परंपरा के अनुसार रथयात्रा और बहुदा यात्रा का आयोजन किया जाता है।
गुंडिचा मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन, सुरक्षा और महाप्रसाद वितरण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।



















