जयपुर। सिंधी समाज के इष्टदेव भगवान श्री झूलेलाल जी के 40 दिवसीय पावन चालीहा महोत्सव का आधा सफर पूरा होने के साथ ही छोटी काशी जयपुर में धार्मिक आस्था का माहौल और अधिक गहरा हो गया है। गुरुवार को महोत्सव के 22वें दिन शहर के प्रमुख झूलेलाल मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आरती, चालीहा प्रार्थना, पल्लव प्रार्थना और अखंड ज्योत के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु का स्मरण कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
समाज के तुलसी संगतानी ने बताया कि इस 40 दिवसीय कठिन साधना के दौरान श्रद्धालु एक समय भोजन, भूमि शयन, केश न कटवाने और सात्विक जीवन शैली जैसे नियमों का पालन कर रहे हैं। महोत्सव में युवाओं, महिलाओं और बच्चों की सहभागिता भी देखने को मिल रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चालीहा के 22वें दिन भक्त अंकरदास की पौड़ी का विशेष महत्व होता है। सिंध के ठट्टा नगर निवासी भक्त अंकरदास अकाल के कारण बादशाह को लगान नहीं दे पाए थे, जिसके चलते उन्हें कारागार में डाल दिया गया था। जेल में रहकर भी उनका भगवान झूलेलाल पर अटूट विश्वास बना रहा और उन्होंने प्रतिदिन प्रभु की स्तुति में एक-एक पद की रचना की।
22वें पद में अंकरदास ने प्रार्थना की— हे दाता! आप अभय देने वाले, दया और सुख के सागर हैं। आप किसी की जाति, कुल या अवगुण नहीं देखते। मुझे संसार के तानों, अपमान और कष्टों से बचाकर अपना करुणामय हाथ सदैव मेरे सिर पर बनाए रखें। सिंधी समाज में यह पौड़ी अटूट श्रद्धा और समर्पण का संदेश देती है।
मानसरोवर स्थित रजत पथ पर श्री झूलेलाल मंदिर में महिलाओं ने पारंपरिक छेज नृत्य प्रस्तुत कर भगवान झूलेलाल को रिझाया। प्रदीप मोटवानी ने बताया कि प्रतिदिन प्रभु को सुरुचि भोग अर्पित किया जा रहा है। इसी कड़ी में वैशाली नगर स्थित झूलेलाल मंदिर में शुक्रवार को विशेष भजन संध्या आयोजित की जाएगी। जगदीश बूलचंदानी ने तैयारियों की जानकारी दी। वहीं जवाहर नगर में भी दिनभर भक्तिमय कार्यक्रमों का दौर जारी रहा।
महोत्सव के समापन अवसर पर 23 अगस्त को भव्य बहिराणा साहिब की शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे। इस दौरान ‘सुरेश एंड पार्टी’ द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। वहीं 24 अगस्त को बहिराणा साहिब विसर्जन एवं विशाल भंडारे के साथ 40 दिवसीय चालीहा महोत्सव का समापन होगा।



















