सच्ची भक्ति और श्रद्धा रखने वाले भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं: आचार्य जैनेन्द्र कटारा

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जयपुर। श्री सनातन धर्म सभा (आदर्श नगर) एवं श्री राम मंदिर प्रन्यास के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य जैनेन्द्र कटारा ने भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार, भक्त प्रहलाद चरित्र तथा समुद्र मंथन की पावन कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा व्यास ने प्रहलाद के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रहलाद बाल्यकाल से ही भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। उनके पिता हिरण्यकशिपु ने उन्हें भक्ति मार्ग से हटाने के लिए कई यातनाएं दीं, लेकिन प्रहलाद का विश्वास नहीं डिगा। अंततः भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप प्रकट कर हिरण्यकशिपु का वध किया और प्रहलाद की रक्षा की।

आचार्य कटारा ने कहा कि जो भक्त सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करता है, उसकी रक्षा के लिए भगवान स्वयं उपस्थित होते हैं। कथा के अगले चरण में समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग की सहायता से क्षीरसागर का मंथन किया गया, जहाँ भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लेकर पर्वत को आधार दिया। मंथन से निकले हलाहल विष का पान कर भगवान शिव ‘नीलकंठ’ कहलाए। इसके पश्चात समुद्र से 14 दिव्य रत्न और भगवान धन्वंतरि का अमृत कलश लेकर प्रकट होने का वर्णन किया गया।

प्रन्यास के अध्यक्ष हरचरण लेकर ने बताया कि कथा का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश प्रसारित करना है। कथा के दौरान “अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम…” भजन पर महिला मंडल ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे संपूर्ण पांडाल भक्तिमय हो गया। संयोजक रवि सचदेवा ने जानकारी दी कि कथा के चौथे दिन सोमवार को वामन अवतार, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्म एवं नंदोत्सव की अलौकिक लीलाओं का वर्णन किया जाएगा।

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