पेशाब की छोटी सी परेशानी भी हो सकती है बड़ी बीमारी का संकेत: डॉ.चारण

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Even a minor urinary issue could be a sign of a serious illness
Even a minor urinary issue could be a sign of a serious illness

जयपुर। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में पेशाब से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, पेशाब शुरू करने में परेशानी या पेशाब की धार कमजोर होना जैसी शिकायतों को अक्सर बढ़ती उम्र या प्रोस्टेट बढ़ने की सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में ये लक्षण प्रोस्टेट कैंसर से भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में पेशाब से संबंधित कोई नई या लगातार बनी रहने वाली समस्या होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।

एचसीजी कैंसर हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. अभिषेक चारण के अनुसार प्रोस्टेट पुरुषों में मूत्राशय के नीचे स्थित छोटी ग्रंथि है और यह प्रजनन तंत्र का हिस्सा है। प्रोस्टेट कैंसर मुख्य रूप से उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखा जाता है। हालांकि, पेशाब से जुड़ी हर समस्या कैंसर के कारण हो, यह जरूरी नहीं है। बढ़ा हुआ प्रोस्टेट (बीपीएच) तथा प्रोस्टेट में सूजन या संक्रमण भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकते हैं।

प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरणों में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लक्षण सामने आने पर पेशाब शुरू करने में कठिनाई, पेशाब की कमजोर या रुक-रुककर आने वाली धार, बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में उठना, पेशाब या वीर्य में खून आना तथा कुछ मामलों में पीठ, कूल्हे या पेल्विस में दर्द शामिल हो सकता है। हालांकि, इन लक्षणों का होना अपने आप में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि नहीं करता।

डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास, लक्षण और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जांच की सलाह देते हैं। प्रोस्टेट कैंसर की जांच में पीएसए (प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन) रक्त जांच का इस्तेमाल किया जा सकता है। पीएसए का स्तर केवल कैंसर में ही नहीं बढ़ता, बल्कि बीपीएच, प्रोस्टेट में संक्रमण या सूजन जैसी गैर-कैंसरकारी स्थितियों में भी बढ़ सकता है। इसलिए केवल एक पीएसए रिपोर्ट के आधार पर कैंसर का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

यदि जांच के आधार पर डॉक्टर को कैंसर की आशंका होती है तो आगे एमआरआई जैसी इमेजिंग जांच कराई जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर प्रोस्टेट बायोप्सी की सलाह दी जाती है। इसमें प्रोस्टेट के ऊतक का नमूना लेकर माइक्रोस्कोप के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं की जांच की जाती है।

विशेषज्ञ के अनुसार, हर प्रोस्टेट कैंसर में तुरंत उपचार की आवश्यकता नहीं होती। कुछ शुरुआती और कम जोखिम वाले प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं। ऐसे चुनिंदा मरीजों में चिकित्सक सक्रिय निगरानी का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें पीएसए, चिकित्सकीय जांच और जरूरत के अनुसार अन्य परीक्षणों के माध्यम से बीमारी की नियमित निगरानी की जाती है। वहीं, बीमारी की अवस्था और जोखिम के आधार पर मरीज को सर्जरी, रेडिएशन या अन्य उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार पेशाब से जुड़ी नई या लगातार बनी रहने वाली समस्या को केवल उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर टालना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने से समस्या के वास्तविक कारण की पहचान की जा सकती है। यदि कोई गंभीर बीमारी मौजूद है तो उसका समय रहते मूल्यांकन और आवश्यक उपचार शुरू किया जा सकता है।

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