जयपुर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस के जयपुर में प्रदर्शन के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर पलटवार किया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने घटते जनाधार और चुनावों में लगातार मिल रही हार से बौखलाई हुई है, जबकि गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है।
कांग्रेस ने सोमवार को जयपुर में कथित ‘वोट चोरी’ और एसआईआर के मुद्दे को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। शहीद स्मारक से निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की बौछार भी की।
राठौड़ बोले- संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की आदत
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि देश में घटते जनाधार और चुनावों में लगातार मिल रही हार के कारण कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर अपनी राजनीतिक असफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस जिस प्रकार प्रदर्शन कर रही है, उससे उसकी राजनीतिक बेचैनी दिखाई देती है।
राठौड़ ने कहा कि निर्वाचन आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के मुद्दे पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के फैसले में बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधानिकता से जुड़े सवालों पर फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार मामला बिहार में एसआईआर के निर्वाचन आयोग के अधिकार, उद्देश्य और प्रक्रिया से जुड़ा था।
बेढम बोले- हार की हताशा में जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस
गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पिछले कुछ दिनों से एसआईआर के मुद्दे को लेकर निर्वाचन आयोग पर आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एसआईआर को लेकर न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया, लेकिन अब निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
बेढम ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी हार की समीक्षा करने के बजाय निर्वाचन आयोग, ईवीएम और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और राजनीतिक स्वार्थ के लिए इनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।



















