चालीस विला-कॉटेज मामले में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराएं : खाचरियावास

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जयपुर। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद मामले को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि केवल अग्रवाल को एपीओ करना पर्याप्त नहीं है। पूरे मामले की राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि लेन-देन से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा हो सके।

खाचरियावास ने कहा कि शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री के ओएसडी और मुख्यमंत्री सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों और कार्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच केवल 40 विला-कॉटेज की खरीद तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उस अवधि के अन्य संदिग्ध लेनदेन और निर्णयों को भी इसके दायरे में लिया जाए।

खाचरियावास ने राइजिंग राजस्थान के तहत उद्योगपतियों को किए गए जमीन आवंटन, निवेश प्रोत्साहन और कर छूट की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि किन उद्योगपतियों और कंपनियों को कितनी जमीन, किस दर पर आवंटित की गई तथा कितनी कर छूट और अन्य रियायतें दी गईं, इसका विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। उनके अनुसार, सरकारी जमीन और करदाताओं के धन से जुड़ी रियायतों में पारदर्शिता जरूरी है।

कांग्रेस नेता ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि करीब ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने और बाद में उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने का मामला सामने आया है। उन्होंने इस पूरे लेन-देन की जांच कर खरीद से लेकर लीज तक की प्रक्रिया में शामिल संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की।

खाचरियावास ने सवाल उठाया कि जब अन्य मामलों में नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जांच एजेंसियां कार्रवाई करती हैं, तो इस प्रकरण की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल एपीओ की कार्रवाई से पूरे मामले की जिम्मेदारी तय नहीं हो सकती।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

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