कमला एकादशी पर मंदिरों में सजेगी जल विहार झांकी

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A 'Jalvihar' tableau will be set up in temples on Kamala Ekadashi.
A 'Jalvihar' tableau will be set up in temples on Kamala Ekadashi.

जयपुर। द्वितीय ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की एकादशी गुरुवार कमला एकादशी के रूप में मनाई जाएगी। इसे परमा, पुरुषोत्तमी भी कहा जाता हैं। अधिक मास में होने के कारण ये व्रत तीन साल में एक बार आता है। अब ये व्रत 9 अप्रैल 2029 को आएगा।
आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक कर लाल रंग की सूती पोशाक धारण कराकर गोचारण लीला भाव से श्रृंगार किया जाएगा। राजभोग झांकी में जल विहार की झांकी सजाई जाएगी। आधे घंटे तक ठाकुरजी जल विहार करेंगे।

सुभाष चौक पानों का दरीबा स्थित श्री सरस निकुंज में पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में राधा सरस बिहारी जू सरकार का वेदोक्त मंत्रोच्चार से अभिषेक किया जाएगा। श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि शाम को एकादशी के पदों का गायन किया जाएगा।

पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ नाथ जी, चौड़ा रास्ता के राधा दामोदर जी, रामगंज बाजार के लाड़ली जी, मुरली मनोहर जी, त्रिपोलिया स्थित ब्रज निधि जी सहित अनेक मंदिरों में एकादशी उत्सव भक्तिभाव से मनाया जाएगा।

वहीं पुरुषोत्तम मास की एकादशी पर गुरुवार को श्याम बाबा के मंदिरों में दरबार सजाकर भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। म्हारे घरा पधारो श्याम संस्था की ओर से मानसरोवर सेक्टर 113 के श्याम पार्क में श्याम प्रभु का गुणगान किया जाएगा। अध्यक्ष रतन कट्टा ने बताया कार्यक्रम शाम 7 बजे शुरू होगा।

ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि अधिकमास की एकादशी के व्रत से पाप, दुख और दरिद्रता दूर होती है। इस दिन भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा, व्रत, दान, जप, भजन और रात में जागरण किया जाएगा।

भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य नाम के अध्याय में इस व्रत का जिक्र किया गया है। वैष्णव परंपरा में प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अधिक मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का नाम, विधि और महत्व बताया था। कथा के भीतर कौण्डिन्य ऋषि ने सुमेधा ब्राह्मण और उनकी पत्नी पवित्रा को यह व्रत करने की सलाह दी थी।

भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप की पूजा सुबह स्नान कर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प करें। इस दिन भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रुप की पूजा करने का विधान है। इस रूप में भगवान की चार भुजाएं होती है। जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म रहते हैं।

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