नाहरगढ़ जैविक उद्यान में उमड़ा पर्यटकों का सैलाब: व्हाइट टाइगर भीम और गोल्डन टाइग्रेस स्कंधी बने आकर्षण का केंद्र

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A massive crowd of tourists flocked to Nahargarh Biological Park.
A massive crowd of tourists flocked to Nahargarh Biological Park.

जयपुर। राजधानी के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में रविवार को पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी। सुहावने मौसम और अवकाश के चलते कुल 5,324 पर्यटकों ने जैविक उद्यान का भ्रमण कर वन्यजीवों का नजदीक से दीदार किया। इस दौरान लायन सफारी और टाइगर सफारी पर्यटकों के लिए सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र रहीं।

रविवार को 261 से अधिक पर्यटकों ने लायन एवं टाइगर सफारी का रोमांचक अनुभव लिया। खासतौर पर राजस्थान की पहली व्हाइट टाइगर सफारी में सफेद बाघ भीम और उसकी गोल्डन बहन स्कंधी को देखकर पर्यटक रोमांचित नजर आए। दोनों बाघों की अठखेलियों और चंचल गतिविधियों ने सैलानियों का मन मोह लिया। बाघों की गर्जना और शेरों की शाही मौजूदगी ने सफारी के रोमांच को और बढ़ा दिया।

नाहरगढ़ जैविक उद्यान में संचालित टाइगर सफारी और लायन सफारी इन दिनों जयपुर सहित देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। प्राकृतिक हरियाली और वन्यजीवों के बीच सफारी का अनुभव लोगों को रोमांच और प्रकृति से जुड़ाव का अनूठा अवसर प्रदान कर रहा है।

उप वन संरक्षक विजयपाल सिंह के निर्देशन में पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधाओं और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) देवेंद्र सिंह राठौड़ एवं रेंजर शुभम शर्मा ने रविवार को सफारियों की सघन मॉनिटरिंग कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टूरिज्म मैनेजमेंट टीम ने टिकटिंग, सफारी संचालन, भीड़ नियंत्रण, वाहन व्यवस्था और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा।

एसीएफ देवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि व्हाइट टाइगर भीम और गोल्डन टाइग्रेस स्कंधी को हाल ही में टाइगर सफारी क्षेत्र में शिफ्ट किया गया है। पर्यटकों के बेहतर दीदार के लिए दोनों को अलग-अलग समय पर सफारी क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। पूर्व में इनकी अठखेलियां जैविक उद्यान परिसर में ही देखने को मिलती थीं, लेकिन अब ये टाइगर सफारी का प्रमुख आकर्षण बन गए हैं।

वन विभाग की सतत निगरानी और प्रभावी प्रबंधन के चलते नाहरगढ़ जैविक उद्यान आज राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और मनोरंजन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
व्यवस्थाओं में प्रदीप सैनी, राजाराम मीणा, विजेंद्र चौधरी, कैलाश चंद्र, सरिता चौधरी, बसंती गुर्जर, विमला मीना, हंसा कुमारी, उमेश वशिष्ठ, संतोष मौर्य, छोटी मीना, रामलाल सैनी, बनवारी लाल शर्मा एवं भंवर सिंह आमला सहित अन्य कार्मिकों ने सहयोग प्रदान किया।

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