जयपुर। राजस्थान कृषि प्रसंस्करण,कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन योजना-2019 (एग्रो पॉलिसी-2019) के तहत लंबित अनुदान प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और भुगतान की मांग तेज हो गई है। राज्यभर के कृषि उद्यमियों, किसानों एवं कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण करने की मांग करने का निर्णय लिया है।
प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ तथा मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से भी मुलाकात कर योजना के लंबित प्रकरणों की पत्रावलियों को शीघ्र स्वीकृति देने और पात्र लाभार्थियों को अनुदान राशि का भुगतान सुनिश्चित कराने का आग्रह किया।
प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की थी। योजना के तहत पात्र निवेशकों को 50 से 75 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान तथा ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पात्र प्रकरण वर्षों से लंबित पड़े हैं।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि अनुदान राशि समय पर नहीं मिलने से कृषि प्रसंस्करण इकाइयां, वेयरहाउसिंग, ऑयल मिल, फूड प्रोसेसिंग और कृषि व्यवसाय से जुड़ी अनेक इकाइयां गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही हैं। इसका प्रतिकूल असर किसानों, ग्रामीण रोजगार और राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि एग्रो पॉलिसी-2019 के सभी लंबित प्रकरणों का उसी नीति के प्रावधानों के तहत तत्काल निस्तारण किया जाए। साथ ही मूल प्रावधानों के अनुसार एकमुश्त अनुदान जारी किया जाए, तीन वर्ष की लॉक-इन अवधि समाप्त की जाए, राज किसान पोर्टल को पुनः संचालित कर ब्याज अनुदान योजना शुरू की जाए तथा लंबित मामलों के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना घोषित की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि ज्ञापन को राजस्थान के विभिन्न जिलों के किसानों, कृषि प्रसंस्करण, वेयरहाउसिंग, ऑयल मिल, फूड प्रोसेसिंग एवं कृषि व्यवसाय से जुड़े अनेक उद्यमियों और संस्थानों का समर्थन प्राप्त है। उनका कहना है कि सरकार की त्वरित पहल से न केवल लंबित निवेशों को राहत मिलेगी, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।



















