जयपुर। प्रदेश में नकली खाद और बीज के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने गुरुवार को जयपुर के कानोता क्षेत्र स्थित हीरावाला रीको औद्योगिक क्षेत्र में संचालित ‘जयपुर बायो फर्टिलाइजर्स’ इकाई पर औचक निरीक्षण कर बड़ी कार्रवाई की। मंत्री के अचानक पहुंचने से फैक्ट्री संचालकों और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान जैविक उर्वरक निर्माण और भंडारण से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद कृषि विभाग ने नमूने जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जैविक उर्वरक का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के विपरीत किया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार जैविक खाद में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को सुरक्षित रखने के लिए निर्माण प्रक्रिया के दौरान तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, लेकिन फैक्ट्री में खाद 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तैयार की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार इतने अधिक तापमान पर लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
जांच में लेबलिंग से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा भी सामने आया। दानेदार जैविक उर्वरक की सामान्य शेल्फ लाइफ छह माह होती है, जबकि उत्पाद के पैकेटों पर 24 माह तक उपयोग योग्य होने का उल्लेख किया गया था। इसके अलावा कच्चे माल के भंडारण और रख-रखाव में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। गोदाम में रखे कच्चे माल पर पहचान संबंधी आवश्यक लेबल नहीं लगे थे, जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की धारा 19 का उल्लंघन माना गया है।
मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्वयं फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया और कई सीलबंद कट्टों को खुलवाकर खाद की गुणवत्ता की जांच की। विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न उत्पादों के नमूने लेकर परीक्षण के लिए सरकारी प्रयोगशाला भेज दिए हैं। साथ ही फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में मौजूद खाद और बीज के स्टॉक की भी जांच की जा रही है।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नकली खाद और घटिया बीज बेचने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं की मेहनत की कमाई से धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाएगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि नमूने अमानक या नकली पाए गए तो संबंधित फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ-साथ लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि डॉ. किरोड़ी लाल मीणा इससे पहले भी सीकर के रीको क्षेत्र स्थित श्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज, जोधपुर की विभिन्न खाद-बीज निर्माण इकाइयों तथा बोरानाडा स्थित बालाजी मूंगफली फैक्ट्री सहित कई प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण और छापामार कार्रवाई कर चुके हैं। कृषि विभाग का कहना है कि प्रदेशभर में गुणवत्तापूर्ण खाद और बीज उपलब्ध कराने तथा नकली कृषि उत्पादों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।


















