जयपुर। प्रस्तावित भूमि अवाप्ति के विरोध में चल रहा नींदड़ बचाओ आंदोलन सोमवार को 619 वें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन से जुड़े किसानों ने एक बार फिर सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि किसानों की इच्छा के विरुद्ध पुश्तैनी जमीन का अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष केवल जमीन बचाने का नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान, अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का भी है। किसानों ने आरोप लगाया कि जब अधिकांश किसान अपनी भूमि छोड़ने से इनकार कर चुके हैं, तब भी भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि 619 दिनों से लगातार जारी धरने के बावजूद किसानों का मनोबल कमजोर नहीं हुआ है। उनका कहना है कि जब तक प्रस्तावित भूमि अवाप्ति निरस्त नहीं की जाती, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. नगेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि नींदड़ के किसान पूरी तरह एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे। उन्होंने सरकार से किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए भूमि अधिग्रहण का निर्णय वापस लेने और न्यायपूर्ण समाधान निकालने की मांग की।
धरने के दौरान किसानों ने “जमीन हमारी – फैसला हमारा” और “अवाप्ति निरस्त करो, किसानों को न्याय दो” जैसे नारे लगाकर अपनी मांगों को दोहराया।



















