जयपुर। आषाढ़ गुप्त नवरात्र का शुभारंभ बुधवार से हो गया है। पहले दिन सुबह से ही जयपुर के करीब 150 से अधिक शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में कलश स्थापना, विशेष पूजा-अर्चना, हवन, अखंड ज्योत और तांत्रिक साधना का दौर शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने मां भगवती की आराधना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
शहर के आमेर स्थित शिला माता मंदिर, राजापार्क के दुर्गा मंदिर, मानसरोवर, परकोटा क्षेत्र तथा अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में नौ दिनों तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। बगलामुखी देवी मंदिरों में घट स्थापना के साथ विशेष तंत्र साधना, मंत्र जाप और हवन शुरू हुए। श्रद्धालुओं की ओर से सवा लाख मंत्रों की आहुतियों का संकल्प भी लिया गया।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस बार गुप्त नवरात्र का आरंभ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग के शुभ संयोग में हुआ है। कलश स्थापना के लिए प्रातः 5:33 बजे से 10:09 बजे तक का समय विशेष शुभ माना गया। इस बार किसी तिथि का क्षय नहीं होने से साधकों को पूरे नौ दिनों तक साधना का अवसर मिलेगा।
प्राचीन दुर्गा और काली मंदिरों में महाआरती, दुर्गा सप्तशती, शतचंडी पाठ और महाप्रसादी के आयोजन किए जा रहे हैं। वहीं शहर के विभिन्न सिद्ध पीठों और आश्रमों में संत-महंतों के सान्निध्य में दस महाविद्याओं की विशेष तांत्रिक साधना, मंत्र जाप और हवन का आयोजन हो रहे है।
हरिओम धाम स्थित दक्षिणमुखी बालाजी मंदिर सहित कई मंदिरों में पंचामृत अभिषेक, विशेष श्रृंगार और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। मंदिरों में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। नौ दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम आरती, हवन, देवी पूजन और धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे।



















