जयपुर। श्रीगंगानगर जिले की सुरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में फर्जी पॉलिसी बनाकर बीमा क्लेम प्राप्त करने की गोपनीय सूचना विभागीय जांच में सही पाई गई है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोडीलाल ने फर्जीवाड़ा का प्रकरण संज्ञान में आने पर संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद श्रीगंगानगर को फर्जीवाडा कर लगभग 30 लाख रूपये का बीमा क्लेम प्राप्त करने के अपराध में शामिल सीएससी (ई-मित्र) एवं दोषी व्यक्तियों के विरूद्व पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की सम्बंधित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज दर्ज करवाकर कठोर कार्यवाई सुनिश्चित करवाने के लिए निर्देश दिये हैं।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि कृषक बनवारी लाल पुत्र सांवला, रिछपाल पुत्र गिरधारी एवं अन्य भागीदार किसान, सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार व बिजेश एवं बीमा कम्पनी के विरूद्व पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने के निर्देश जारी किये गये हैं।
फर्जीवाड़े का अनोखा तरीका- एक ही ज़मीन पर सात लोगों ने 30 लाख का फर्जी बीमा उठाया—
जांच में सामने आया है कि बनवारी लाल ने स्वयं के खसरा नम्बर 281/91 पर ऋणी किसान के रूप में 10.37 हैक्टर में मूंगफली फसल बीमा करवाया और इसी खसरा की जमीन पर सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार से भी 10.37 हैक्टर में मूंगफली व बिजेश से भी 10.3 हैक्टर में मूंगफली का फसल बीमा करवाया। बनवारी लाल ने तीनों फसल बीमा पॉलिसी पर कुल 23,35,319 रूपये का क्लेम प्राप्त किया है।
बनवारी लाल ने इसी खसरा की जमीन को रिछपाल पुत्र गिरधारी को बटाई /लीज पर दिया और रिछपाल ने भी 10.37 हैक्टर में मूंगफली का बटाईदार किसान के रूप में फसल बीमा करवाया । रिछपाल ने भी 7,80,195 रूपये का फसल बीमा क्लेम प्राप्त किया है।
इस खसरा के 10.37 हैक्टर में अन्य किसान इमीचन्द पुत्र महावीर, प्रमीला पत्नी सुनिल साहरण एवं ओमप्रकाश पुत्र राजाराम ने भी मूंगफली का फसल बीमा करवाया था, जिसे बीमा कम्पनी ने रिजेक्ट कर दिया था। इस प्रकरण में बीमा कम्पनी की संलिप्तता की पुष्टि हुई है।
एक ही खसरा पर अनेक पॉलिसी जारी की गई और खसरे के वास्तविक क्षेत्रफल से 7 गुना अधिक क्षेत्र पर बीमा करवाया गया था। विभाग का मानना है कि इस तरह का संगठित फर्जीवाड़ा सीएससी (ई-मित्र), बीमा कम्पनी तथा संबंधित किसानों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोडीलाल ने स्पष्ट कहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचे, इसके लिए विभाग दृढ़ है। फर्जी पॉलिसी जारी करने में शामिल बीमा कम्पनी, सीएससी (ई-मित्र), सहयोगी किसानों, सक्रिय दलालों, बीमा कंपनी के कर्मचारियों तथा वित्तीय संस्थाओं के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मंगलवार को टोंक एवं जयपुर में एफआईआर दर्ज करवाई थी—
कृषि विभाग ने मंगलवार को टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में खरीफ 2026 के लिए फर्जी फसल बीमा कराने वाले ई मित्र संचालक एवं दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई थी।
कृषि विभाग चला रहा है ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा योजना, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस—
कृषि आयुक्त ने बताया कि इस बार कृषि विभाग ने कृषि बीमा पॉलिसी के साथ फार्मर आईडी को अनिवार्य किया है,इससे फर्जीवाड़ा करने वालों की तुरंत पहचान हो जाएगी। ऐसे सभी किसान जिन्होंने कृषि लोन नहीं लिया है तथा फसल बीमा कराया है, इन सब मामलों की गहनता से जाँच की जाएगी। कृषि विभाग ने ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा चलाया है। राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। देश की सबसे इस सबसे बड़ी योजना के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा ।
फर्जी तरीके से पॉलिसी के लिए आवेदन करने वालों को पॉलिसी निरस्त कराने का अंतिम अवसर—
गोयल ने सभी सीएससी (ई-मित्र) संचालकों, किसानों, ब्रोकर, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को आगाह किया है कि यदि किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई से कोई नहीं बच पाएगा। फर्जी तरीके से बनाई गई फसल बीमा पॉलिसियों को तत्काल निरस्त करवा लिया जाए अन्यथा कठोर कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
कृषि विभाग ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और योजना का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा।
















