जयपुर। राजधानी में विजयादशमी के पर्व को लेकर उत्साह और तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन रविवार को अचानक हुई तेज बरसात ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले तैयार करने वाले कारीगरों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। महीनों की मेहनत से तैयार किए गए पुतले बारिश में भीगकर खराब हो गए। इससे कारीगरों और छोटे कामगारों को लाखों रुपए के नुकसान का सामना करना पड़ा है।
पिछले साल की परेशानी फिर लौटी
कारीगर कालू ने बताया कि पिछले साल भी दशहरे से ठीक पहले हुई बरसात के कारण कई पुतले खराब हो गए थे और उन्हें भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ा था। इस बार भी अचानक मौसम बदलने और तेज बारिश शुरू होने से कारीगरों में अफरा-तफरी मच गई। वे अपनी मेहनत और पूंजी से तैयार पुतलों को बचाने के लिए सुरक्षित स्थान तलाशने में जुट गए।

प्लास्टिक और तिरपाल से ढंकने की कोशिश नाकाम
बारिश शुरू होते ही कारीगरों ने पुतलों और उनके अलग-अलग हिस्सों को प्लास्टिक, पॉलीथिन और तिरपाल से ढंककर बचाने का प्रयास किया। खुले स्थानों पर रखे पुतलों को बारिश से बचाने के लिए मजदूरों ने भीगते हुए काफी मशक्कत की, लेकिन तेज बारिश के कारण कई पुतले भीग गए। पानी पड़ने से उनकी सजावट और रंग-रोगन को भी नुकसान पहुंचा।

कर्ज लेकर तैयार किए थे पुतले
कारीगर विजय और राहुल के अनुसार बांस, कागज, गत्ते और कतरन से तैयार पुतले पानी में भीगने से कमजोर हो गए। कई पुतलों का ढांचा बिगड़ गया और कागज गलने लगा। सजावट खराब होने से उन्हें बेचने में भी परेशानी आने की आशंका है। कारीगरों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर और अपनी जमा-पूंजी लगाकर पुतले तैयार किए थे। साल भर में दशहरे का सीजन ही उनकी कमाई का प्रमुख जरिया है। ऐसे में अचानक हुई बरसात ने उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा कर दिया है।
सरकार-प्रशासन से मदद की गुहार
कारीगरों का कहना है कि पिछले साल की बरसात से हुए नुकसान की भरपाई भी मुश्किल से हो पाई थी, लेकिन इस बार फिर मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। लाखों रुपए के नुकसान से परेशान पुतला निर्माताओं ने सरकार और प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें और परिवार की आजीविका चला सकें।



















