जयपुर/ दौसा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र में मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि करीब 2.30 बजे हुए भीषण सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 से अधिक यात्री घायल हो गए। ऋषिकेश से इंदौर जा रही निजी स्लीपर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गई। आग इतनी भीषण थी कि बस और ट्रेलर दोनों जलकर कबाड़ में तब्दील हो गए। हादसे के बाद मृतकों की पहचान मुश्किल होने पर छह शवों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार के अनुसार बस में करीब 39-40 यात्री सवार थे। हादसे में छह यात्रियों और बस चालक रामोतार की आग में झुलसने से मौत हो गई, जबकि दो अन्य यात्रियों की सिर में गंभीर चोट लगने से जान चली गई। मृतकों में भूमि, प्रियंका, निर्मला, देवेंद्र, दीपक और चालक रामोतार की पहचान हुई है, जबकि अन्य शवों की पहचान डीएनए जांच से होगी। घायलों का उपचार दौसा जिला अस्पताल और अन्य अस्पतालों में जारी है। इनमें 13 की हालत गंभीर बताई गई है।

एफएसएल जांच में सामने आए अहम तथ्य
डिप्टी एसपी धर्मेंद्र कुमार के अनुसार एफएसएल और विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बस तेज रफ्तार में ट्रेलर के पीछे चल रही थी। अंधेरे और लूप पर पर्याप्त संकेतक नहीं होने से चालक ट्रेलर का सही अनुमान नहीं लगा सका और बस का अगला हिस्सा ट्रेलर में घुस गया। टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के बाद एक्सप्रेस वे की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। घटनास्थल के पास जयपुर की ओर जाने वाले लूप पर न तो पर्याप्त साइन बोर्ड, न रोड लाइट और न ही सीसीटीवी कैमरे मिले। स्थानीय लोगों का कहना है कि जयपुर की दिशा बताने वाला स्पष्ट संकेत नहीं होने से चालक भ्रमित हो जाते हैं और अचानक ब्रेक लगाने से दुर्घटनाएं होती हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्र होने के बावजूद मौके पर एंबुलेंस और दमकल की तत्काल उपलब्धता भी नहीं थी।
बस में सिगरेट के बॉक्स होने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि बस की डिक्की में सिगरेट के कई बॉक्स रखे थे, जिससे आग तेजी से फैली। हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। मामले की जांच जारी है।
यात्रियों ने सुनाई दर्दनाक आपबीती
घायलों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद बस में आग फैल गई और लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने लगे। कई यात्री सीटों में फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि बस का इमरजेंसी गेट नहीं खुला, जिससे जनहानि बढ़ गई। कई घायलों ने यह भी दावा किया कि हादसे के बाद करीब एक घंटे तक कोई राहत दल मौके पर नहीं पहुंचा।
इंदौर निवासी जितेंद्र पांडे ने बताया कि उनकी पत्नी प्रियंका सीट के नीचे फंस गई थीं और उनकी आंखों के सामने ही आग में झुलस गईं। वहीं घायल दिव्या अपने लापता पति की तलाश में अस्पताल में प्रशासन से गुहार लगाती रही।

जांच के आदेश, आठ सदस्यीय समिति गठित
दौसा जिला कलेक्टर सौम्या झा ने हादसे की जांच के लिए आठ सदस्यीय समिति गठित कर शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। एफएसएल टीम और पुलिस बस में आग लगने के कारणों, ट्रेलर की स्थिति तथा एक्सप्रेस वे की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच कर रही है।
जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा तथा महवा विधायक राजेन्द्र मीणा ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने बस के इमरजेंसी गेट नहीं खुलने और सुरक्षा मानकों की जांच की मांग की।
पुलिस ने ट्रेलर और बस को कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
दौसा पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ऋषिकेश से इंदौर जा रही स्लीपर बस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई, जिसके बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। हादसे में आठ लोगों की मौत हुई है तथा 21 से अधिक यात्री घायल हुए हैं। मृतकों में आग से झुलसने के कारण हुई मौतों के अलावा कुछ की मौत गंभीर चोट लगने से हुई है। कई शव बुरी तरह जल जाने से उनकी पहचान नहीं हो सकी है, इसलिए डीएनए परीक्षण कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एफएसएल और विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है तथा दुर्घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। बस में आग किन कारणों से इतनी तेजी से फैली, इसकी भी वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। बस की डिक्की में सिगरेट के बॉक्स होने के संबंध में स्थानीय लोगों के दावों की भी जांच की जा रही है, लेकिन फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसपी ने कहा कि दुर्घटना के संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। बस चालक, ट्रेलर चालक, सड़क की स्थिति, एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा इंतजाम, संकेतक (साइन बोर्ड) तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जाएगी। घायलों का उपचार कराया जा रहा है और मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा एसडीएम संजू मीणा समेत कई आला अधिकारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से मिलकर घायलों के इलाज की जानकारी ली और उन्हें बेहतर से बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए।



















