सोमवार को मनेगी गणेश चतुर्थी: बन रहा दुर्लभ संयोग

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जयपुर। गुलाबी नगरी ‘छोटीकाशी’ में गणेश चतुर्थी का पर्व सोमवार, 14 सितंबर को विभिन्न मांगलिक योगों के अद्भुत संयोग में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके साथ ही दस दिवसीय गणेशोत्सव का आगाज होगा, जिसका समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ होगा।

राजधानी के मोती डूंगरी गणेश जी, गढ़ गणेश, नहर के गणेश जी, ध्वजाधीश गणेश और लाल डूंगरी गणेश मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों में प्रथम पूज्य के विशेष पूजन, श्रृंगार और भोग की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शहर भर में महाआरती, जागरण और शोभायात्राओं के आयोजन किए जाएंगे। साथ ही परकोटे के सभी प्रमुख द्वारों पर विराजित गणेश जी का भी विशेष पूजन होगा।

पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार पंचांग के तहत चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के मान से गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी। सुबह 11:08 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक (मध्याह्न काल), ब्रह्म योग (दोपहर 12:47 बजे तक), रवि योग और स्वाति नक्षत्र का शुभ संयोग।

इस बार गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज एक ही दिन पड़ रहे हैं। तृतीया तिथि सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद चतुर्थी शुरू होगी। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी, वहीं शुभ मुहूर्त में घरों और सार्वजनिक पंडालों में रिद्धि-सिद्धि के दाता की स्थापना की जाएगी।

सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होने और इसी दिन उनके पुत्र श्री गणेश की चतुर्थी पड़ने से इस पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वारपाल के रूप में गणपति की स्थापना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाएगी।

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