जयपुर। जयपुर के ऐतिहासिक इंदिरा बाजार भिंडों का रास्ता में दो दिन पहले जब सैकड़ों साल पुराना ऐतिहासिक बरगद का पेड़ अचानक धराशायी हुआ, तो हर जयपुर वासी का दिल टूट गया था। ऐसा लगा मानो शहर ने अपनी पहचान और कोई बहुत पुराना बुजुर्ग खो दिया हो। हालांकि पेड़ गिरने से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन धर्मपरायण जनता को इसका गहरा दुख था। लेकिन जयपुरवासियों की एकता और अटूट आस्था ने महज 48 घंटों में इतिहास बदल दिया।
विरासत को जीवंत रखने के संकल्प के साथ आज ‘धरोहर बचाओ समिति’ के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने पूरे विधि-विधान के साथ उसी स्थान पर एक नया विशाल बरगद का पेड़ रोपकर इंदिरा बाजार को उसकी रौनक और पहचान वापस लौटा दी है।
121 बार ‘श्री राम’ मंत्रोच्चारण और वैदिक रीति-रिवाज से हुआ वृक्षारोपण
‘धरोहर बचाओ समिति’ के अध्यक्ष एडवोकेट भारत शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की श्रद्धा देखने को मिली। नए पेड़ को लगाने से पहले पूरे विधि-विधान से भूमि और वृक्ष का पूजन किया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने 121 बार ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ महामंत्र का जाप किया। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर रोली-मोली से पेड़ की पूजा की गई। श्रद्धा स्वरूप उस स्थान की मिट्टी में सिक्के डाले गए और भगवान को लड्डुओं का भोग लगाकर सभी में प्रसाद वितरित किया गया।
महिलाओं और युवाओं ने संभाली कमान, उमड़ा जनसैलाब
इस पावन और ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए बाजार और आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। विशेष रूप से महिलाओं में इस वृक्षारोपण को लेकर भारी उत्साह था, जिन्होंने पूरे पारंपरिक तरीके से नए बरगद के वृक्ष की पूजा-आरती की।
विरासत कभी खत्म नहीं होती, उसे बस एक नई शुरुआत की ज़रूरत होती है
इस संकल्प को साकार करने के इस अवसर पर शिवम बैरवा, नितेश नागर, कुलदीप मीणा, कपिल तोंदवाल, गणेश पारीक, भुवनेश जैमिनी, जोनी नागर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और स्थानीय निवासी उपस्थित रहे। आज उसी स्थान पर मुस्कुराता हुआ नया बरगद का पेड़ जयपुरवासियों के जज्बे की कहानी बयां करता नजर आया।



















