ज्येष्ठ माह शुरू: मंदिरों में होंगे ज्येष्ठाभिषेक के आयोजन, शिवलिंग पर बंधेगी गलंतिका

0
40
Month of Jyeshtha Begins: Jyeshthabhishek Ceremonies to be Held in Temples
Month of Jyeshtha Begins: Jyeshthabhishek Ceremonies to be Held in Temples

जयपुर। शनिवार को हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ की शुरुआत हो गई। यह 29 जून तक चलेगा। इस माह श्रद्धालु भगवान विष्णु, सूर्य देव और हनुमान जी की उपासना में लीन रहेंगे। प्रचंड गर्मी के कारण मंदिरों में प्रमुख तिथियों को ज्येष्ठाभिषेक के आयोजन होंगे। ठाकुरजी को शीतल जल से स्नान कराया जाएगा। शिव मंदिरों में शिव लिंग पर मटके या कलश रखे जाएंगे।

मटके से जल की धार सतत रूप से प्रवाहित होती रहेगी। इसे गलंतिका कहा जाता है। दान-पुण्य के हिसाब से ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व माना गया है। इस माह में जलदान का सबसे अधिक महत्व बताए जाने से जगह-जगह प्याऊ लगाई जाएगी। प्रमुख मार्गों पर वाटर कूलर लगाए जाएंगे। श्रद्धालु मंदिरों में भी जल से भरे मटके दान करेंगे।

ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व माना जाता है। यह महीना सिर्फ भीषण गर्मी के लिए ही नहीं, बल्कि भक्ति-सेवा के लिए भी जाना जाता है।

ज्येष्ठ माह में वट सावित्री व्रत, निर्जला एकादशी, गायत्री जयंती, शनि जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व-त्योहार भी आएंगे। इस बार ज्येष्ठ माह और भी खास इसलिए है, क्योंकि अधिक मास के संयोग से यह सामान्य दिनों से लंबा होकर 59 दिनों तक चलेगा। यह दुर्लभ योग भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए एक विशेष अवसर प्रदान करेगा। इस माह में जगह-जगह प्याऊ लगाई जाएगी।

वट सावित्री व्रत और शनि जयंती

ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या तिथि पर सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत किया जाता है, जो इस बार 16 मई को किया जाएगा। माना जाता है कि सुहागिन महिलाओं द्वारा इस व्रत करने से उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही इस दिन पर शनि अमावस्या भी पड़ रही है, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इसी दिन शनि जन्मोत्सव मनाया जाएगा। शनि मंदिरों में पंचामृत अभिषेक, महातेलाभिषेक के बाद फूल बंगला झांकी सजाई जाएगी।

गंगा दशहरा:

ज्येष्ठ माह में मनाए जाने वाला गंगा दशहरा एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो इस बार 25 मई को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल की दशमी तिथि पर ही मां गंगा देवलोक से धरती पर अवतरित हुई थीं। इस तिथि को गंगा स्नान, दान, जप-तप, उपासना और उपवास के लिए उत्तम माना गया है।

निर्जला एकादशी व्रत:

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह व्रत गुरुवार, 25 जून को किया जाएगा। साल की सभी 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण मानी गई है, क्योंकि इस दिन निर्जला व्रत करने से श्रद्धालु को साल की सभी चौबीस एकादशियों के उपवास रखने के समान फल मिलता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here