जयपुर। राजस्थान पुलिस के गौरवशाली इतिहास और सेवा के 77 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित जयपुर के रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल पर राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत पुलिस बैंड की शानदार प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। इस भव्य सांस्कृतिक संध्या का लाइव प्रसारण आधिकारिक माध्यमों से किया गया, जिसमें पुलिस के अनुशासित और कलात्मक पक्ष का अनूठा संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर मुख्य सचिव वी श्रीनिवास मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने राजस्थान पुलिस की सेवार्थ कटिबद्धता की परंपरा को उद्घाटित करते हुए 77वें पुलिस स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की भव्य शुरुआत को भी सराहनीय बताया। इससे पहले डीजी(लॉ एंड आर्डर) संजय अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए राज्य भर में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों के बारे में बताया।
आभार प्रदर्शन अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस रुपिंदर सिंघ ने दिया। समारोह में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वीके सिंह, बिपिन पाण्डेय, सचिन मित्तल, बीजू जार्ज जोसफ, प्रशाखा माथुर, संजीव नार्जरी भावना शर्मा सहित रिटायर्ड डीजीपी, विभाग के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। समारोह के अंत में कलाकारों को पुरस्कृत व सम्मानित किया गया।

राष्ट्रभक्ति और राजस्थानी संस्कृति का आगाज़
कार्यक्रम की शुरुआत एक गौरवशाली वातावरण में हुई, जब सेन्ट्रल बैंड ने जनरल सैल्यूट और वंदे मातरम की ओजपूर्ण धुनें बिखेरीं। इसी क्रम में बेण्ड मास्टर मनोज कुमार के नेतृत्व में प्रसिद्ध राजस्थानी धुन ‘नीबूड़ा’ पेश की गई, जिसने राजस्थान की मिट्टी की खुशबू बिखेर दी। राष्ट्रभक्ति के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए बीएसएफ बैंड ने ‘ताकत वतन की हमसे है’ और संयुक्त ब्रांस बैंड ने ‘संदेशे आते हैं’ की धुन बजाकर सरहद के जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
82 वर्षीय रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने दी यादगार प्रस्तुति
समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था जब 82 वर्षीय रिटायर्ड इंस्पेक्टर शिव प्रकाश ने माउथ ऑर्गन हाथ में लिया। उन्होंने अपनी उम्र को दरकिनार करते हुए ‘आजा सनम मधुर चांदनी में’ तथा ‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल…’ की ऐसी सुमधुर प्रस्तुति दी कि वहां मौजूद हर शख्स सम्मोहित हो गया। उनकी इस ऊर्जा और कला के प्रति समर्पण को देख पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सदाबहार गीतों के नाम रही शाम
बैंड शो के दौरान फिल्मी संगीत के सुनहरे दौर की यादें ताजा हो गईं। उप-निरीक्षक राधेश्याम ने ‘मैं शायर तो नहीं’ और ‘इक रास्ता है ज़िन्दगी’ के माध्यम से जीवन के दर्शन को संगीत में पिरोया। वहीं, महिला रिक्रूट कविता ने ‘ये समा, समा है प्यार का’ और ‘मेरे सपनों की रानी’ जैसे मधुर गीतों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। दिनेश कुमार और कुणाल चौहान की जोड़ी ने ‘एक हसीना थी’ की धुन पर अपनी बेहतरीन जुगलबंदी पेश की।
विविधता और तकनीक का संगम
भीलवाड़ा के शंकर महादेव ने ‘जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया’ गाकर भारत की गौरवगाथा सुनाई, तो रिक्रूट टीकमचंद ने ‘रिमझिम गिरे सावन’ और ‘आने वाला पल’ जैसे गीतों से माहौल को खुशनुमा बना दिया। पंजाब पुलिस बैंड की ‘सौंन दी झड़ी’ और महिला पाईप बैंड के ‘भारत रत्न’ डिस्प्ले ने जोश भर दिया।
और…कर दिया सबको भावुक
कार्यक्रम में सेन्ट्रल बैंड द्वारा प्रस्तुत ‘केसरी’ गीत, ‘तेरी मिट्टी’ और ‘अमेजिंग ग्रेस’ की धुन ने सभी को भावुक कर दिया। पाइप बैंड के भूपेंद्र सिंह ने ‘मेरे संग-संग आया तेरी यादों का मेला’ की सुरीली प्रस्तुति के साथ यादों की एक लंबी लकीर खींच दी।

ड्रोन शो और आतिशबाजी ने किया सम्मोहित
कार्यक्रम के समापन के अवसर पर राजस्थान पुलिस की ओर से आयोजित आकर्षक ड्रोन शो ने आसमां में विविध संदेश और चित्राकृतियों और रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने सबको सम्मोहित कर दिया।
लाइव प्रसारण से जुड़े हजारों दर्शक
तकनीक के माध्यम से इस भव्य आयोजन को आम जनता तक पहुँचाया गया। लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने जुड़कर राजस्थान पुलिस को उनके स्थापना दिवस की बधाई दी और पुलिस बैंड की सराहना की। सोशल मीडिया पर भी इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह देखा गया।




















