जयपुर। सफाई कर्मचारी भर्ती को लेकर राजस्थान सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौते के बाद वाल्मीकि समाज में नाराजगी सामने आई है। जयपुर नगर निगम यूनियन के अनुसार सफाई भर्ती के संबंध में राजस्थान सरकार के साथ हुए समझौता पत्र क्रमांक 13567, दिनांक 1 जुलाई 2026 से प्रदेश का वाल्मीकि समाज सहमत नहीं है। समाज का कहना है कि इस समझौते को लेकर वाल्मीकि समाज में व्यापक आक्रोश व्याप्त है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश में वर्षों से सफाई व्यवस्था का दायित्व वास्तविक रूप से वाल्मीकि समाज के लोग निभाते आ रहे हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारी भर्ती की प्रक्रिया में उनके हितों की सुरक्षा और पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वाल्मीकि समाज ने मांग की है कि वर्तमान में प्रदेश के स्थानीय निकायों में कार्यरत सभी सफाई कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर यथास्थिति बनाए रखते हुए स्थायी नियुक्ति दी जाए। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के अनुभव और योगदान को भर्ती प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।
समाज ने प्रदेश के सभी नगर निकायों में लागू ठेका प्रथा समाप्त करने की भी मांग उठाई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि ठेका व्यवस्था के कारण सफाई कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।
इसके साथ ही समाज ने मांग की है कि ठेका प्रथा के तहत कार्यरत सफाई कर्मचारियों को यथास्थिति के आधार पर संविदा अथवा नियमित नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए सफाई कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और भर्ती प्रक्रिया में उनके अधिकारों को प्राथमिकता देने की अपील की है।



















