जयपुर। झोटवाड़ा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किराए पर ली गई व्यावसायिक या आवासीय संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उस पर अवैध कब्जा करने और बाद में संपत्ति खाली करने के बदले मोटी रकम मांगने वाले दो शातिर भाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तैयार किए गए कूटरचित खरीद इकरारनामा और भुगतान रसीद सहित फर्जी दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों की इसी तरीके से संपत्ति विवाद खड़ा कर रकम ऐंठने की कार्यप्रणाली सामने आई है। पुलिस उपायुक्त जयपुर पश्चिम प्रशांत किरण ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सचिन सिंह भाटी (42) और उसका भाई सुमित सिंह उर्फ सन्नी (42) मूल रूप से चौपासनी हाउसिंग बोर्ड जिला जोधपुर के रहने वाले हैं। दोनों वर्तमान में वैशाली नगर विस्तार, भांकरोटा में रह रहे थे।
आरोपी सचिन सिंह के खिलाफ पानी का प्लांट लगाने के नाम पर अग्रिम राशि लेकर धोखाधड़ी करने के मामले जोधपुर, जयपुर और हिमाचल प्रदेश सहित कई स्थानों पर दर्ज हैं। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, वैशाली नगर और चित्रकूट थानों में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले भी दर्ज हैं।
वहीं सुमित सिंह के खिलाफ चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, देव नगर, महिला थाना जोधपुर और झोटवाड़ा थाने में एनडीपीएस एक्ट, चोरी और मारपीट सहित पांच मामले दर्ज हैं। थानाधिकारी रायसल सिंह ने बताया कि परिवादी सांवरमल अग्रवाल ने 5 फरवरी 2026 को न्यायालय के इस्तगासे के जरिए झोटवाड़ा थाने में मामला दर्ज कराया था कि किराएदार सचिन सिंह और उसके भाई सुमित सिंह ने मिलकर उनकी किराए की संपत्ति का फर्जी खरीद इकरारनामा और भुगतान रसीद तैयार कर ली और फैक्ट्री पर अवैध कब्जा कर लिया।
आरोपियों ने फैक्ट्री खाली करने के बदले परिवादी से मोटी रकम की मांग भी की। इस पर झोटवाड़ा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई। जहां टीम को जांच के दौरान आरोपी सचिन सिंह संपत्ति की वैध खरीद से संबंधित कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
इसके बावजूद मुकदमा दर्ज होने के बाद उसने परिवादी के खिलाफ सिविल कोर्ट में मामला दायर कर दिया और वहां फर्जी भुगतान रसीद और खरीद इकरारनामा पेश कर दिया। पुलिस ने अदालत में पेश किए गए इन दस्तावेजों को जब्त कर लिया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण किया। तकनीकी सहायता और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों की कार्यप्रणाली सामने आई है। दोनों पहले व्यावसायिक या आवासीय उपयोग के लिए संपत्ति किराए पर लेते और मालिक का विश्वास जीतते थे। इसके बाद मकान मालिक के हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल कर फर्जी खरीद-बेचान के दस्तावेज तैयार कर लेते थे। इन कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति को विवादित बना दिया जाता था।
बाद में संपत्ति खाली करने के बदले मालिक से रकम की मांग की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इस तरीके से कितनी संपत्तियों को निशाना बनाया और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में उनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हैं।



















