योगिनी एकादशी शुक्रवार को: भगवान विष्णु की आराधना का महापर्व

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Yogini Ekadashi on Friday
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जयपुर। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार 10 जुलाई को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ रखा जाएगा। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी की विधि-विधान से पूजा तथा व्रत करने से अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि, आरोग्य तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि योगिनी एकादशी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से चर्म रोगों से राहत तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।

योगिनी एकादशी की तिथि 10 जुलाई सुबह 8:16 बजे से प्रारंभ होकर 11 जुलाई सुबह 5:22 बजे तक रहेगी। व्रत का पारण 11 जुलाई को दोपहर 2:03 बजे से शाम 4:42 बजे के बीच किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि एकादशी के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी का पूजन करना चाहिए। पीपल के वृक्ष की पूजा भी शुभ मानी गई है। पूरे दिन सात्विक आचरण अपनाते हुए भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करें तथा रात्रि में दीप प्रज्ज्वलित कर श्रीविष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। यथाशक्ति रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है।

पंडित शर्मा के अनुसार एकादशी के दिन घर में झाड़ू लगाने से बचना चाहिए। आवश्यकता होने पर कपड़े से सफाई की जा सकती है। बाल कटवाना या अन्य क्षौर कर्म नहीं करने चाहिए। व्रत धारियों को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए तथा गोभी, गाजर, शलजम, पालक और विशेष रूप से चावल के सेवन से बचना चाहिए। यथाशक्ति अन्नदान करना पुण्यदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का माध्यम है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से रोगों से मुक्ति, मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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