जयपुर। सुभाष चौक पानो का दरीबा स्थित श्री शुक सम्प्रदाय आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज में आयोजित अष्टयाम सेवा महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार को श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में ठाकुर श्री राधा सरस विहारी जू सरकार के विविध लाड़ लड़ाए गए।
इनमें ब्यारु भोग और विवाह महोत्सव प्रमुख रहे। श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि ब्रज और वृन्दावन की परंपरा में श्री प्रिया-लाल (राधा-कृष्ण) को रात में अर्पित किए जाने वाले विशेष भोजन को ब्यारु भोग कहा जाता है। यह रात्रि में ठाकुर जी के शयन से पहले का मुख्य प्रसाद होता है। यह भक्ति और प्रेम का प्रतीक है।
यह मुख्य रूप से निकुंज सेवा के अंतर्गत आने वाला एक आध्यात्मिक भाव है। इस मौके पर ब्यारु करत है घनश्याम दूध भात खोवा बासुंदी ले आई ब्रजबाल आशकरण प्रभु मोहन नागर अंग अंग अभिराम…जैसे पदों का गायन किया गया।
इसके बाद ठाकुरजी का विवाह महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। वैष्णव भक्तों ने विवाह का जमकर आनंद लूटा। श्री सरस परिकर को फूलों से सजाया गया। अष्टयाम सेवा के अंतर्गत 15 मई को आचार्य जयंती महोत्सव एवं शयन कुंज के साथ अष्टयाम सेवा महोत्सव का समापन होगा।



















