जयपुर। अधिकमास के अवसर पर सूरजपोल स्थित मोहनबाड़ी के श्री गोवर्धननाथ जी मंदिर में चल रहे 11 दिवसीय श्रीमद्भागवत एकादश एवं मूल श्लोक परायण का गुरुवार को विधिवत समापन हुआ।
श्री पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंडल एवं श्री वल्लभ पुष्टिमार्गीय मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित कथा के समापन अवसर पर बड़ौदरा निवासी भागवत मर्मज्ञ गिरिराज शास्त्री ने सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित मोक्ष सहित विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का समापन अत्यंत भावुक और ज्ञानवर्धक होता है, जिसमें भक्ति, समर्पण और मोक्ष का संदेश निहित होता है। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि शुकदेव जी द्वारा भागवत श्रवण से वे मोह-माया से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हुए।
सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के बीच निस्वार्थ मित्रता और भक्ति भाव को सर्वोत्तम आदर्श बताया। इस अवसर पर कथा के प्रारंभ एवं समापन पर पीडी बांगड़ व एमडी बांगड़ परिवार ने पूजा-अर्चना कर आरती उतारी। कार्यक्रम में श्री पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंडल के अध्यक्ष गोविंद मालपानी, मंत्री पीडी बांगड़, कोषाध्यक्ष सोहनलाल अग्रवाल (टुकड़ेवाला) सहित कई पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



















