जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) राजस्थान क्षेत्र के कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) का समापन समारोह शनिवार को आदर्श नगर स्थित सूरज मैदान में आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि गुरुद्वारा साहिब, जवाहर नगर, टीला नंबर-5 के प्रधान सरदार राजन सिंह रहे, जबकि कार्यक्रम का मुख्य उद्बोधन संघ के राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने दिया।
समारोह में राजस्थान के विभिन्न जिलों और स्थानों से आए शिक्षार्थियों ने शारीरिक प्रशिक्षण, सामूहिक कार्यक्रमों तथा विविध कौशलों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। वर्ग में 231 स्थानों से कुल 277 शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। इनमें 97 कर्मचारी, 57 व्यवसायी, 8 किसान एवं श्रमिक तथा 115 महाविद्यालय और तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी शामिल रहे। वर्ग संचालन में 40 शिक्षकों, 37 प्रबंधकों, 21 विभाग प्रमुखों और 3 प्रांत प्रमुखों ने दायित्व निभाया।
20 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग के दौरान शिक्षार्थियों ने प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात्रि 10:15 बजे तक अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हुए शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण में योग, व्यायाम, खेल, दंड प्रशिक्षण और अन्य शारीरिक गतिविधियों के साथ राष्ट्र, समाज, संस्कृति तथा समसामयिक विषयों पर बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए श्रम साधना, स्वच्छता अभियान, वृक्ष एवं जल संरक्षण तथा जैविक खाद निर्माण जैसे कार्य भी कराए गए।
अपने संबोधन में सरदार राजन सिंह ने स्वयंसेवकों के अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए युवाओं का समर्पण देखकर भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के बारे में राय बनाने से पहले उसके कार्यों को स्वयं देखना और समझना चाहिए। गुरु नानक देव की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल भावना एकता, सेवा, परिश्रम और सहयोग को बताया तथा युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा संगठन, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की सतत साधना की यात्रा है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना ऐसे समय में हुई थी, जब समाज में निराशा का वातावरण था। ऐसे दौर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने दैनंदिन शाखा की कार्यपद्धति के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि संघ की शाखा स्वयंसेवकों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल, सेवा भाव, बंधुत्व और राष्ट्रभक्ति जैसे गुणों का विकास करती है। प्रारंभिक दौर में उपेक्षा और विरोध का सामना करने वाला संघ आज समाज की व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त कर चुका है तथा बड़ी संख्या में युवा स्वेच्छा से इससे जुड़ रहे हैं।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संघ ने विभाजन काल में विस्थापितों की सेवा, गौसंरक्षण आंदोलन, श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन, श्रीराम मंदिर निर्माण, रामसेतु संरक्षण तथा कोरोना महामारी के दौरान सेवा कार्यों सहित अनेक राष्ट्रीय अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना मूल रूप से एकात्म हैं तथा इसी विचार के आधार पर संघ समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है। संघ की प्रेरणा से आज 36 से अधिक संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र निर्माण के कार्य में सक्रिय हैं। समारोह में संघ के क्षेत्रीय एवं प्रांतीय अधिकारी, गणमान्य नागरिक, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।



















