जयपुर। भारत की प्राचीन यात्रा परंपरा को सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण से जोडऩे की दिशा में अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद 9 से 15 जून तक राष्ट्रीय गौ सम्मान संकल्प यात्रा: 11 ज्योतिर्लिंग पीठाधीश्वर संवाद अभियान का आयोजन करेगी।
गौ संरक्षण, गौ संवर्धन, प्राकृतिक कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को समर्पित यह यात्रा देश के प्रमुख संतों, धर्माचार्यों और ज्योतिर्लिंग पीठाधीश्वरों के साथ संवाद स्थापित कर एक व्यापक राष्ट्रीय गौ सम्मान घोषणा-पत्र तैयार करेगी। इसे केन्द्र एवं राज्य सरकारों को सौंपा जाएगा।
परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में निकलने वाली इस यात्रा में परिषद की संयुक्त सचिव मोनिका चतुर्वेदी गुप्ता सहित गौसेवा, कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। यात्रा के प्रमुख पड़ावों में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं कालभैरव मंदिर (उज्जैन), ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, शिर्डी साईं बाबा समाधि मंदिर, त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग, शनि शिंगणापुर तथा पंचवटी (नासिक) शामिल हैं।
डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि भारत में यात्राएं केवल धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति नहीं रही हैं। वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक यात्राएं समाज को जोडऩे, विचारों का आदान-प्रदान करने और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान खोजने का प्रभावी माध्यम रही हैं। आज जब देशभर में विभिन्न धार्मिक यात्राओं पर करोड़ों रुपए और लाखों मानव-घंटों का निवेश होता है, तब आवश्यक है कि इन यात्राओं को केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित न रखकर राष्ट्र और समाज के ज्वलंत विषयों पर चिंतन और समाधान का मंच बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ऋषि, मुनि, आचार्य और संत देशभर में भ्रमण कर समाज की समस्याओं को समझते थे तथा संवाद के माध्यम से उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त करते थे। राष्ट्रीय गौ सम्मान संकल्प यात्रा उसी वैदिक परंपरा के पुनस्र्थापन का प्रयास है। यात्रा के दौरान विभिन्न पीठाधीश्वरों, संतों, गौशाला संचालकों, कृषकों और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद कर गौ संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक, आर्थिक और नीतिगत सुझाव एकत्र किए जाएंगे।
यात्रा का उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर घोषित कराने के लिए जनमत निर्माण करना, गौहत्या निषेध कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय सहमति विकसित करना तथा गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का राष्ट्रीय मॉडल तैयार करना है।
इसके साथ ही गौ आधारित प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय गौ सम्मान नीति का प्रारूप तैयार करने, धार्मिक संस्थाओं और सरकारों के मध्य समन्वित कार्ययोजना विकसित करने तथा गौ आधारित ग्रामीण रोजगार और पंचगव्य उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष चर्चा होगी।
यात्रा के दौरान तैयार किए जाने वाले राष्ट्रीय गौ सम्मान घोषणा-पत्र में गौमाता को राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने, राष्ट्रीय गौ आयोग को संवैधानिक दर्जा देने, गौशालाओं के लिए पृथक राष्ट्रीय नीति बनाने, गौ आधारित प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मिशन घोषित करने तथा प्रत्येक राज्य में गौ संरक्षण एवं संवर्धन प्राधिकरण गठित करने जैसी महत्वपूर्ण मांगों को शामिल किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए विशेष बजट, शैक्षणिक संस्थानों में गौ विज्ञान एवं प्राकृतिक कृषि अध्ययन तथा पंचगव्य आधारित उद्योगों को एमएसएमई एवं स्टार्टअप योजनाओं से जोडऩे संबंधी सुझाव भी शामिल होंगे।



















