जयपुर। आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर में “करिकुलम रिफॉर्म फॉर इंटरडिसिप्लिनरी डिपार्टमेंट्स” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य संस्थान में संचालित छह नए इंटरडिसिप्लिनरी एमएससी कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम को कॉम्पिटेंसी आधारित एवं आउटकम ओरिएंटेड शिक्षा प्रणाली के अनुरूप अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाना रहा।
उद्घाटन सत्र में संस्थान के कुलपति प्रो. पी. हेमंता कुमार ने कहा कि आयुर्वेद शिक्षा में इंटरडिसिप्लिनरी शिक्षा, नवाचार और शोध आधारित स्नातकोत्तर प्रशिक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित कर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना संस्थान की प्राथमिकता है।
कार्यशाला में कुलसचिव प्रो. अनीता शर्मा, प्रो. मीता कोटेचा, डीन इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज प्रो. सर्वेश कुमार अग्रवाल, प्रो. कमलेश शर्मा, प्रो. कनिका वर्मा, प्रो. श्रीनाथ वैद्य, डॉ. विनोद कुमार एम.वी., डॉ. गौरव फुल, प्रो. अंचित गुगनानी, डॉ. परमवीर शेखावत, प्रो. जेराल्डीन जैन तथा डॉ. बिष्णु चौधरी सहित कई विशेषज्ञों ने अपने सुझाव और अनुभव साझा किए।
दो दिनों तक छह इंटरडिसिप्लिनरी विभागों—आयुर्वेद डाइट एंड न्यूट्रिशन, आयुर्वेद मैन्युस्क्रिप्टोलॉजी, आयुर-योग प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मर्मोलॉजी एंड स्पोर्ट्स मेडिसिन, सौंदर्य आयुर्वेद तथा वृक्षायुर्वेद—के लिए समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें विभागाध्यक्षों, फैकल्टी सदस्यों और विषय विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम संशोधन पर विस्तृत चर्चा की।



















