जयपुर। विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर गुरुवार को पुलिस कमिश्नरेट जयपुर की रिजर्व पुलिस लाइन में बंधुआ मजदूरी एवं मानव तस्करी की रोकथाम और प्रभावी कार्रवाई विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी जैसे गंभीर अपराधों की रोकथाम के लिए कानूनी प्रावधानों, पीड़ितों की पहचान, बचाव, पुनर्वास तथा प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया पर अधिकारियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
इस कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने कहा कि मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी संगठित अपराध की श्रेणी में आने वाले गंभीर अपराध हैं। इनकी रोकथाम के लिए पुलिस की संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई तथा विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक मामले में पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (आईजेएम) जयपुर के तकनीकी सलाहकार एडवोकेट प्रधान, एडवोकेट जे. जेम्स तथा स्टेट प्रोग्राम डायरेक्टर केरेन पीटरसन ने संसाधन वक्ता के रूप में बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, मानव तस्करी की पहचान, नवीन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), बचाव अभियान, कानूनी प्रावधानों, पीड़ितों के संरक्षण एवं पुनर्वास तथा विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
संवादात्मक सत्रों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से अधिकारियों को विषय की व्यवहारिक समझ भी विकसित कराई गई। इस कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी जैसी कुप्रथाओं के उन्मूलन तथा पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संवेदनशील, त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। साथ ही मानव तस्करी मुक्त समाज के निर्माण के लिए समन्वित प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
कार्यक्रम में विशेष पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश सहित जयपुर पुलिस आयुक्तालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



















