अहोई अष्टमी पर संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा व्रत

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The fast of Ahoi Ashtami will be on 24th, Guru Pushya and Sarvartha Siddhi Yoga
The fast of Ahoi Ashtami will be on 24th, Guru Pushya and Sarvartha Siddhi Yoga

जयपुर। छोटी काशी जयपुर में रविवार को संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का प्रतीक अहोई अष्टमी का पावन पर्व अत्यंत धार्मिक उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस बार अहोई अष्टमी के साथ ज्योतिष शास्त्र के सबसे शुभ माने जाने वाले ‘रवि पुष्य नक्षत्र’ का दुर्लभ महासंयोग बनने से इस दिन का धार्मिक व व्यापारिक महत्व और अधिक बढ़ गया।

माताओं ने जहां दिनभर निर्जला व्रत रखकर अहोई माता और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की, वहीं शुभ मुहूर्त में खरीदारी और दान-पुण्य के लिए भी बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेंद्र मिश्रा के अनुसार, ज्योतिषीय गणना के तहत जयपुर में पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर को सूर्योदय से शुरू होकर 2 नवंबर की सुबह लगभग 4:31 बजे तक प्रभावी रहा।

रविवार को सूर्योदय से लेकर पूरे दिन श्रद्धालुओं को इस महासंयोग का पुण्य फल प्राप्त हुआ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ योग में भगवान गणेश और अहोई माता के पूजन से संतान के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि और मंगल का आगमन होता है।

अहोई अष्टमी के अवसर पर जयपुर के घर-घर और मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। माताओं ने अहोई माता के चित्र व स्याऊ माता की पूजा कर कथा सुनी और तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। विघ्नहर्ता भगवान गणेश के मंदिरों में विशेष झांकी और अनुष्ठान आयोजित किए गए। लोगों ने घरों में भी गणेश पूजन, अथर्वशीर्ष पाठ और सामूहिक आरती की।

इस विशेष दिन जरूरतमंदों की सेवा, अन्नदान, वस्त्रदान और गऊ सेवा का विशेष महत्व रहा, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

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