त्रिवेणी धाम में गुरुपूर्णिमा पर उमडा भक्तों का जन सैलाब

0
44

जयपुर। शाहपुरा के पास त्रिवेणी धाम में गुरुपूर्णिमा पर सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रख्यात संत नारायण दास महाराज की तपस्थली त्रिवेणी धाम में दूर दराज से आये लोगों ने गुरुपूजन किया। खोजी जी द्वाराचार्य खोजी पीठ त्रिवेणी धाम खोजी पीठाधीश्वर राम रिछपाल दास महाराज से हजारों शिष्यों ने गुरु दीक्षा लेकर गुरु मन्त्र लिया। धाम में श्रद्धा और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला।

ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालु परिवार सहित घाटों पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों के संगम में आस्था की डुबकी लगाकर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों, गुरु पूजन, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य के कार्यक्रमों से त्रिवेणी धाम का वातावरण भक्तिमय बना रहा।सुबह से ही त्रिवेणी संगम और अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ मंदिरो के दर्शन कर गुरुओ के प्रति श्रद्धा प्रगट की।

इस अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। राम रिछपाल दास महाराज ने अपने प्रवचनों में गुरु के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही जीवन को सही दिशा प्रदान करता है और अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों, सेवा, सद्भाव और संस्कारों को अपनाने का संदेश भी दिया।गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की ओर से दान-पुण्य के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, फल और धार्मिक पुस्तकों का वितरण किया गया। वहीं गुरु पूर्णिमा पर धाम में आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। युवाओं ने सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए श्रद्धालुओं को पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के विशेष प्रबंध किए थे।

जिले के प्रमुख मंदिरों और आश्रमों में पुलिस बल तैनात रहा। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए बैरिकेडिंग, पार्किंग और यातायात की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। चिकित्सा दल, एंबुलेंस तथा आपदा राहत दल भी सतर्क रहे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के बीच भजन-कीर्तन, सत्संग और गुरु वंदना के कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराया। गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर त्रिवेणी में सनातन संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा, सनातन आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here