जयपुर। ब्रेन ट्यूमर चिकित्सा विज्ञान की सबसे जटिल और गंभीर बीमारियों में से एक है। समय पर पहचान और उपचार से न केवल मरीज के जीवन को बचाया जा सकता है, बल्कि उसकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है। यह बात फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर के सीनियर डायरेक्टर एवं न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. हेमंत भारतीय ने कही।
डॉ. भारतीय ने बताया कि भारत में मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) के ट्यूमर सभी कैंसर मामलों का लगभग 2 प्रतिशत हैं। ब्रेन ट्यूमर के मामलों में पांच वर्ष तक जीवित रहने की दर करीब 36 प्रतिशत है। ऐसे में समय पर पहचान और उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने बताया कि शरीर के अन्य अंगों की तुलना में मस्तिष्क में होने वाले सौम्य (बेनाइन) और घातक (मैलिग्नेंट) ट्यूमर के बीच अंतर करना आसान नहीं होता, क्योंकि दोनों ही प्रकार के ट्यूमर जानलेवा साबित हो सकते हैं। मस्तिष्क की महत्वपूर्ण संरचनाओं पर दबाव पड़ने से सामान्य कार्य प्रभावित होने लगते हैं।
डॉ. भारतीय के अनुसार सौम्य ब्रेन ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और इनके शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने की संभावना बहुत कम होती है। हालांकि, ये आसपास के मस्तिष्क ऊतकों पर दबाव बनाकर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। वहीं घातक ब्रेन ट्यूमर तेजी से बढ़ते हैं, आसपास के स्वस्थ मस्तिष्क ऊतकों में फैल सकते हैं और समय पर उपचार नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकते हैं। ऐसे ट्यूमर में सर्जरी के बाद दोबारा होने की संभावना भी अधिक रहती है।
उन्होंने बताया कि ब्रेन ट्यूमर स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित कर, मस्तिष्क में दबाव बढ़ाकर या मस्तिष्कीय तरल के सामान्य प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर समस्याएं पैदा करते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार या तेज सिरदर्द, मिर्गी के दौरे, आंखों की रोशनी कम होना, सुनने में कमी, निगलने में परेशानी, सोचने, बोलने या समझने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवा तथा चलने में असंतुलन और चक्कर आना शामिल हैं।
डॉ. भारतीय ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर की पहचान के लिए शारीरिक एवं न्यूरोलॉजिकल जांच के साथ ब्रेन एमआरआई सबसे प्रभावी जांच मानी जाती है। इसके माध्यम से ट्यूमर की स्थिति और प्रकार का भी पता लगाया जा सकता है। यदि किसी कारणवश एमआरआई संभव नहीं हो तो सीटी स्कैन का सहारा लिया जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि लगातार होने वाले सिरदर्द, उल्टी, नए प्रकार के दौरे, अचानक कमजोरी, दृष्टि में बदलाव या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि परिवार में ब्रेन ट्यूमर का इतिहास रहा हो तो जेनेटिक काउंसलिंग कराने और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने की सलाह भी दी।
डॉ. भारतीय ने कहा कि ब्रेन ट्यूमर की समय पर पहचान से उपचार की सफलता की संभावना बढ़ जाती है और जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।



















