जयपुर। बच्चों को आधुनिक समाज में आगे बढ़ाने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और वैदिक संस्कारों से जोड़े रखने के लिए हर साल की तरह इस बार भी गुप्त वृन्दावन धाम ने एक अनूठी पहल की है। गर्मियों की छुट्टियों के विशेष अवसर पर धाम में ‘कल्चर कैंप’ (संस्कारों की पाठशाला) का भव्य शुभारंभ हुआ है। कैंप के पहले बैच की शुरुआत आज, 18 मई से हो चुकी है, जिसमें बच्चे अगले 15 दिनों तक वैदिक कलाओं और जीवन मूल्यों की बारीकियां सीखेंगे।
चरित्र निर्माण के साथ सीखेंगे वैदिक कलाएँ
इस कल्चर कैंप का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के चरित्र का निर्माण करना और उन्हें धार्मिक व नैतिक शिक्षाओं से जोड़ना है। 15 दिनों तक चलने वाले इस शिविर में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई रचनात्मक और आध्यात्मिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमे बच्चे धार्मिक थिएटर और कीर्तन, अभिनय और संगीत के माध्यम से संस्कृति से जुडेगे।
भगवद गीता के श्लोक- बच्चों को गीता के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण और उनका अर्थ सिखाया जाएगा। वैदिक आर्ट, क्राफ्ट, ड्राइंग और पेंटिंग: कला के जरिए भारतीय संस्कृति को समझने का मौका, बिना आग की कुकिंग बच्चों को आत्मनिर्भर और रचनात्मक बनाने के लिए रसोई की बुनियादी कला के गुर सिखाए जाएगे।
इस शिविर की सबसे खास बात यह है कि इसमें बच्चों को ‘हरे कृष्ण महामंत्र’ का जाप करना सिखाया जाएगा, ताकि वे अपने जीवन में मानसिक शांति और धार्मिक पथ पर आगे बढ़ सकें। इस शिविर में कक्षा 1 से लेकर 10वीं तक के छात्र-छात्राएं भाग ले सकते है। शिविर का समय प्रात साढ़े 7 से दोपहर 12 बजे तक रहेगा और शिविर की अवधि 18 मई से अगले 15 दिनों तक रहेगी।
बड़े बच्चों के नैतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए गुप्त वृन्दावन धाम तत्वावधान में एक और सराहनीय कदम उठाया गया है। कल्चर कैंप के साथ-साथ ही कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए ‘निःशुल्क पुरुषोत्तम कैंप’ का आयोजन भी किया गया है, जहाँ किशोर वर्ग के छात्र जीवन प्रबंधन और वैदिक मूल्यों के सूत्र सीख सकेंगे।
धाम प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से बच्चों में न केवल सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि वे छुट्टियों का सही सदुपयोग कर एक जिम्मेदार नागरिक बनने की ओर अग्रसर होते हैं।



















