जयपुर। ब्रह्मपुरी स्थित ऐतिहासिक गढ़ गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर महा गणपति जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर महंत प्रदीप औदीच्य के सान्निध्य में हुए आयोजन में श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के विशेष बाल स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर की परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी पर गणपति महाराज बिना सूंड और बिना वस्त्र के बाल रूप में दर्शन देते हैं। यह दुर्लभ पुरुषाकृति बाल स्वरूप वर्ष में केवल एक बार जन्मोत्सव के अवसर पर दिखाई देता है।
गणेश चतुर्थी पर सुबह 4 बजे पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद पत्र-पुष्प की मालाओं से विशेष शृंगार किया गया। बाल स्वरूप की परंपरा के चलते गणपति को वस्त्र धारण नहीं कराए गए। सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ सहस्र दुर्वाचन और एक हजार मोदकों का अर्पण किया गया। दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद सहस्र नामावली से हवन हुआ।
शाम 7 बजे संध्या आरती और रात 12 बजे शयन आरती हुई। जन्मोत्सव के दौरान विशेष झांकी भी सजाई गई। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। मंदिर परिसर और आसपास बैरिकेडिंग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती तथा 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है।
आयोजन के तहत मंगलवार को पारंपरिक मेला भी आयोजित किया गया। सुबह अभिषेक और नवीन वस्त्र धारण कराने के बाद सुबह 5 बजे मंगला आरती और दोपहर 12 बजे भोग आरती हुई। इसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद शयन आरती होगी।



















