नर्सेज आंदोलन: सरकारी असंवेदनशीलता से प्रदेशभर में आंदोलन तेज होने के संकेत

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जयपुर। राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा नर्सेज का धरना चौथे दिन भी सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज द्वार पर जारी रहा। आंदोलनरत नर्सेज ने सरकार पर गंभीर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दी है।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में दिवंगत संविदा नर्स दीपक खारवाल के आश्रित को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने, तथा वर्षों से सेवाएं दे रहे हजारों नर्सेज को अचानक हटाए जाने के आदेश को वापस लेकर करीब 2000 संविदा नर्सेज को पुनः सेवा में लेने की मांग शामिल है।

इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को जनाना चिकित्सालय के नियमित एवं अनियमित नर्सेज ने मनोचिकित्सालय में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश मंत्री कैलाश शर्मा, संयोजक के.के. यादव, राकेश शर्मा और लोकेश कुमार के नेतृत्व में दो घंटे (प्रातः 8 से 10 बजे तक) जोरदार नारेबाजी के साथ विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान कई नर्सेज नेताओं ने सरकार से तत्काल समाधान की मांग उठाई। वहीं, संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक राजेंद्र सिंह राना, पुरुषोत्तम कुम्भज और पवन मीना ने बताया कि आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा प्रदेशभर में जिला स्तरीय समितियों का गठन कर विरोध तेज करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि बुधवार को जे.के. लोन चिकित्सालय के नर्सेज भी प्रदीप नीमरोट और शकुंतला पूनिया के नेतृत्व में प्रातः 8 बजे से दो घंटे विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने दावा किया कि प्रदेश के करीब 20 जिलों—जैसे झालावाड़, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, कोटा और दौसा—में भी नर्सेज ने प्रदर्शन किया, लेकिन चिकित्सा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है।

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