ओरण संरक्षण को लेकर जयपुर में प्रदर्शन

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Protest in Jaipur over Oran conservation
Protest in Jaipur over Oran conservation

जयपुर। प्रदेश में चारागाह और वन क्षेत्र (ओरण) के संरक्षण की मांग को लेकर गुरुवार को राजधानी जयपुर में बड़ा जन आंदोलन देखने को मिला। सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन से निकली ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ में जैसलमेर सहित प्रदेशभर से सैकड़ों लोग शामिल हुए। पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने वाली थी, लेकिन पुलिस ने इसे भवानी निकेतन के पास ही रोक दिया, जिससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई।

पदयात्रा में बाड़मेर जिले के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी शामिल हुए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जैसलमेर की अंतरराष्ट्रीय सीमा से बड़ी संख्या में बुजुर्ग जयपुर पहुंचे हैं, जिन्होंने 1965 और 1971 के युद्ध में देश की सेवा की, लेकिन आज उन्हें अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग उठाई।

भाटी ने कहा कि वर्तमान में ओरण भूमि का बड़ा हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने से अतिक्रमण बढ़ रहा है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा हो रहे अतिक्रमण पर सरकार गंभीर नहीं है और इस दिशा में स्पष्ट नीति का अभाव है।

उन्होंने खेजड़ी संरक्षण से जुड़े प्रस्तावित बिल का भी जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने इसे सदन में लाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। विश्नोई समाज सहित कई वर्गों द्वारा इस मुद्दे पर आंदोलन किए जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह पदयात्रा 21 जनवरी को जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से शुरू हुई थी और लंबे सफर के बाद जयपुर पहुंची है। कड़ाके की सर्दी से लेकर भीषण गर्मी तक नंगे पैर यात्रा कर रहे लोगों ने ओरण, गोचर भूमि, खेजड़ी वृक्षों, नदियों, नालों और तालाबों के संरक्षण की मांग उठाई।

पदयात्रा के दौरान ‘जय जय जैसाण’ के नारों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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