श्रीकृष्ण कथा महोत्सव : गोविंद देव जी मंदिर में गूंजी गिरिराज धरण की महिमा

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Shri Krishna Katha Mahotsav: Glory of Giriraj Dharan echoed in Govind Dev Ji Temple
Shri Krishna Katha Mahotsav: Glory of Giriraj Dharan echoed in Govind Dev Ji Temple

जयपुर। आराध्य देव श्री गोविंद देव जी मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा महोत्सव के तीसरे दिन मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर हो गया। कथा व्यास महंत संजय गोस्वामी महाराज ने अपनी मधुर वाणी से गोवर्धन पूजा एवं गिरिराज धारण लीला का अत्यंत भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा प्रसंग सुनाते हुए महंत संजय गोस्वामी महाराज ने कहा कि जब देवराज इंद्र को अपनी शक्ति और सामर्थ्य का अभिमान हो गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा की जगह गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने की प्रेरणा दी। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रजमंडल पर मूसलाधार वर्षा कर प्रलय जैसे हालात पैदा कर दिए।

“ब्रजवासियों और गौवंश पर आए इस संकट को टालने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली (छोटी उंगली) पर विशाल गिरिराज गोवर्धन पर्वत को धारण कर लिया। उन्होंने लगातार सात दिनों तक ब्रज की रक्षा की और अंततः इंद्र के अहंकार को चकनाचूर कर दिया। महाराज ने इस लीला के माध्यम से गहरा संदेश देते हुए कहा कि अहंकार का अंत हमेशा निश्चित होता है और जो भक्त सर्वस्व त्यागकर भगवान की शरण में रहता है, उसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।

कथा के विशेष अवसर पर ठाकुर श्री गोविंद देव जी महाराज के समक्ष छप्पन भोग की भव्य कलात्मक झांकी सजाई गई। विभिन्न प्रकार के पकवानों, मिठाइयों और फलों से सजे इस महाभोग और ठाकुरजी की मनोहारी झांकी के अलौकिक दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल हो गए।कथा के विश्राम और आरती के समय पूरा मंदिर परिसर भक्ति के चरम आनंद में डूब गया।

जैसे ही गायकों ने पारंपरिक भजनों की तान छेड़ी,मैं तो गोवर्धन को जाऊं, मेरे वीर, गिरिराज धरण, मैं तो तेरी शरण, तब श्रद्धालु खुद को रोक नहीं पाए और अपने स्थान पर खड़े होकर भावविभोर होकर झूमने और नाचने लगे। पूरे मंदिर परिसर में जयकारों और तालियों की गूंज से वातावरण अत्यंत दिव्य और उत्साहमय बन गया। बड़ी संख्या में आए शहरवासियों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ कमाया।

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