जयपुर। सिंधी समाज की आस्था और भक्ति का प्रतीक 40 दिवसीय भगवान झूलेलाल चालीहा साहिब अनुष्ठान सोमवार, 24 अगस्त को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न होगा। 16 जुलाई को सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश के साथ शुरू हुए इस महाव्रत के समापन को लेकर शहर के झूलेलाल मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
चालीहा साहिब के दौरान श्रद्धालुओं ने 40 दिनों तक नियम-संयम का पालन करते हुए पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, बहिराणा साहिब पूजन, अखो पूजा और पल्लव प्रार्थना में भाग लिया। रविवार को समापन की पूर्व संध्या पर शहर के विभिन्न मंदिरों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
सेक्टर-62 स्थित झूलेलाल मंदिर में बच्चों और युवाओं के लिए भगवान झूलेलाल पर आधारित प्रश्नोत्तरी और भजन अंत्याक्षरी हुई। मालवीय नगर सेक्टर-1 मंदिर में दीदी भारती खुशलानी ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिसके बाद महाआरती हुई। राजापार्क स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक और भंडारे का आयोजन किया गया।
रजत पथ, मानसरोवर स्थित झूलेलाल मंदिर के आयोजक प्रदीप मोटवानी ने बताया कि सोमवार को समापन अवसर पर 151 बहिराणा साहिब ज्योत यात्रा निकाली जाएगी। श्रद्धालु 151 थालों में प्रज्वलित दीप और पूजन सामग्री के साथ भगवान झूलेलाल की प्रतिमा को मस्तक पर धारण कर यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद चालीहा साहिब का विसर्जन और आम भंडारा होगा।
समाजबंधु तुलसी संगतानी ने बताया कि चालीहा साहिब सिंधी समाज की धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। समापन पर श्रद्धालु पल्लव प्रार्थना कर परिवार, समाज और देश में सुख-समृद्धि, शांति और भाईचारे की मंगलकामना करेंगे।



















