गंगा दशहरा :देवालयों में सजी गंगावतरण की झांकी

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जयपुर। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी सोमवार को गंगा दशहरा के रूप में मनाई गई। कई शुभ योग-संयोग में पतित पावनी मां गंगा का पूजन किया गया। गोविंद देवजी मंदिर के पीछे जय निवास उद्यान स्थित गंगा गोपाल जी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा मैया का पूजन किया। भक्तों को गंगा जल प्रसाद रूप में दिया गया। स्टेशन रोड स्थित गंगा माता मंदिर में गंगा मैया का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई।

ऋतु पुष्पों से श्रृंगार किया गया। चौड़ा रास्ता स्थित गंगा माता मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। विभिन्न संस्थाओं की ओर से गंगा जल का वितरण किया गया। गलता तीर्थ स्थित गालव गंगा का पूजन किया गया। स्वामी अवधेशाचार्य महाराज के सानिध्य में गालव गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने गंगा लहरी के पाठ किए। आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में गंगा दशमी पर जल यात्रा की झांकी सजाई गई। ठाकुर जी और राधा जी ने आधे घंटे तक जल विहार किया।

गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र, रवि योग, व्यतिपात योग, आनंद योग, गुरु-चंद्रमा की युति (गजकेसरी योग) सहित पांच विशेष शुभ योग रहे। इन शुभ संयोगों में गंगा स्नान, दान, जप-तप, तर्पण और पूजा-अर्चना की गई। उल्लेखनीय है कि दशमी तिथि का प्रारंभ 25 मई को प्रातः: लगभग 4:30 बजे से हो गया था। इसका समापन 26 मई को प्रातः: लगभग 5:10 बजे होगा।

गंगा दशहरा को ही मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। ब्रह्म पुराण के अनुसार इस दिन किए गए गंगा स्नान और दान से तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक दोषों का शमन होता है। यही कारण है कि इस तिथि को दश-हरा कहा गया है। ज्येष्ठ अधिक मास के सोमवार को गंगा दशमी होने से शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ का पूजन किया गया। बड़ी संख्या में छोटीकाशी के श्रद्धालुओं ने देश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों पर आस्था की डुबकी लगाई।

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