टाटा मोटर्स का ‘कौशल्य’ प्रोग्राम: 23,000 से अधिक युवाओं को स्किल

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Tata Motors’ ‘Kaushalya’ Program: Skilling over 23,000 youths
Tata Motors’ ‘Kaushalya’ Program: Skilling over 23,000 youths

मुंबई। वर्ल्ड यूथ स्किल्स डे से पहले टाटा मोटर्स ने अपने प्रमुख ‘कौशल्य’ प्रोग्राम के माध्यम से देश के युवाओं की आकांक्षाओं और उपलब्धियों को रेखांकित किया। यह देश की अग्रणी उद्योग-प्रेरित कौशल विकास पहलों में से एक है।

शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस प्रोग्राम के तहत अब तक 23,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 5,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है, जिसमें 100% प्लेसमेंट दर और 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियां शामिल हैं।

भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच यह प्रोग्राम युवाओं को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और उभरती मोबिलिटी तकनीकों में भविष्य के अनुरूप कौशल प्रदान कर रहा है। साथ ही, यह उद्योग में कुशल प्रतिभा की मांग और उपलब्धता के बीच की दूरी को भी कम कर रहा है।

रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ यह प्रोग्राम उन वर्गों के लिए भी नए रास्ते खोल रहा है, जिनकी विनिर्माण क्षेत्र में अब तक सीमित भागीदारी रही है। प्रतिभागियों में 21% महिलाएं हैं, जबकि 25% सामाजिक रूप से वंचित वर्गों से आते हैं। इससे अधिक विविध और समावेशी कार्यबल तैयार करने की दिशा को बल मिलता है।

टाटा मोटर्स के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर सीताराम कांडी ने कहा, “भारत की विनिर्माण क्षमता और मोबिलिटी क्षेत्र की प्रगति काफी हद तक कुशल कार्यबल पर निर्भर करती है। ‘कौशल्य’ प्रोग्राम के माध्यम से हम तकनीकी शिक्षा, उद्योग का व्यावहारिक अनुभव और वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव एक साथ उपलब्ध करा रहे हैं।

इससे युवाओं को बेहतर करियर बनाने में मदद मिल रही है और उद्योग के लिए आवश्यक कुशल प्रतिभा भी तैयार हो रही है। हमारे प्रशिक्षुओं के मजबूत प्लेसमेंट परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से रोजगारोन्मुख और भविष्य के अनुरूप कौशल विकसित किए जा सकते हैं। हम इस प्रोग्राम के दायरे को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि अधिक से अधिक युवा देश की विकास यात्रा का हिस्सा बन सकें।”

2021 में शुरू हुआ यह प्रोग्राम पुणे, जमशेदपुर, लखनऊ, पंतनगर, साणंद और धारवाड़ स्थित विनिर्माण संयंत्रों में संचालित हो रहा है। इसके तहत ‘अर्न एंड लर्न’ मॉडल पर मैकाट्रॉनिक्स में पूर्णतः प्रायोजित डिप्लोमा कराया जाता है। पाठ्यक्रम में कक्षा की पढ़ाई के साथ संयंत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। प्रशिक्षुओं को ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकाट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, IoT और इंडस्ट्री 4.0 जैसे क्षेत्रों में कौशल विकसित कराया जाता है।

                                                                                                                                                     प्रोग्राम पूरा करने के बाद प्रशिक्षुओं को टाटा मोटर्स से जुड़े विभिन्न संस्थानों में रोजगार के अवसर मिलते हैं, जिनमें डीलरशिप, सप्लायर्स, टाटा समूह की कंपनियां, अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय नियोक्ता शामिल हैं। कई पूर्व प्रशिक्षु टाटा स्टील डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, ज़ायडस, जेएसडब्ल्यू ग्रीनटेक, सब्रोस, स्पिन्नी और विप्रो जैसी कंपनियों में कार्यरत हैं। इस प्रोग्राम के तहत 50 प्रशिक्षुओं को स्लोवाकिया के नित्रा स्थित जगुआर लैंड रोवर के संयंत्र में भी अवसर मिला है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका मिला।

अपना अनुभव साझा करते हुए, डिप्लोमा इन मैकाट्रॉनिक्स की प्रशिक्षु और वर्तमान में स्लोवाकिया स्थित जगुआर लैंड रोवर में कार्यरत अनीता केंदे बेठेकर ने कहा, “एक दूरदराज़ आदिवासी गांव से होने के कारण वैश्विक स्तर पर करियर बनाना कभी असंभव लगता था।

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