जयपुर। अधिक मास के अवसर पर सूरजपोल स्थित मोहनबाड़ी के श्री गोवर्धन नाथ जी मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय श्रीमद्भागवत एकादश एवं मूल श्लोक परायण, श्री गोवर्धन नाथ व मथुराधीश प्रभु दर्शन तथा 56 भोग महोत्सव के तहत सोमवार को खस महल के मनोरथ की भव्य झांकी सजाई गई। आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही और दर्शन के लिए दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा।
श्री पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंडल एवं श्री वल्लभ पुष्टिमार्गीय मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष नारायण दास अग्रवाल, मंत्री सोहनलाल टुकड़े वाला, संयोजक नटवरलाल मालपानी एवं कोषाध्यक्ष गोरधन दास भगत ने बताया कि करीब एक क्विंटल खस से तैयार इस झांकी में फूल-पत्तियों के साथ विभिन्न खिलौनों का भी उपयोग किया गया। करीब 30 कारीगरों ने 12 घंटे की मेहनत से इस मनोरम झांकी को तैयार किया। झांकी दर्शन के दौरान जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
इससे पूर्व व्यासपीठ से बड़ोदरा निवासी भागवत मर्मज्ञ गिरिराज जी शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा प्रारंभ से पहले पीडी बांगड़ एवं एमडी बांगड़ परिवार ने श्रीमद्भागवत जी की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी।
कथावाचक गिरिराज जी शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वात्सल्य, प्रेम और अलौकिक ज्ञान का अद्भुत संगम हैं। माखन चोरी, मिट्टी खाने और ओखल बंधन जैसी लीलाओं के माध्यम से भगवान ने प्रेम, समर्पण और अहंकार त्याग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यशोदा मैया को अनगिनत जन्मों के तप का फल मिला, जब स्वयं भगवान ने उनके प्रेम के आगे अपने आपको समर्पित कर दिया।
उन्होंने गोपियों के प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण अपनी दिव्य लीलाओं से गोपियों के क्रोध को भी प्रेम में बदल देते थे, जिससे वे अपनी सुध-बुध खोकर आनंद में मग्न हो जाती थीं। महाराज ने कहा कि भगवान को पाने के लिए पांडित्य नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम और भोलापन आवश्यक है।



















