जयपुर। राजस्थान में तंबाकू और अन्य धूम्रपान उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 211 लोग तंबाकू जनित रोगों के कारण असामयिक मृत्यु का शिकार हो रहे हैं, जबकि वर्षभर में यह संख्या करीब 77 हजार तक पहुंच जाती है।
वैश्विक स्तर पर हर साल 70 लाख से अधिक तथा भारत में लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। इसके साथ ही राजस्थान से ही दुनियाभर के लिए तंबाकू के सेवन से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए वालंटियर भी शिक्षा ग्रहण कर रहें है।
तंबाकू नियंत्रण एवं जागरुकता पर काम करने वाले सुखम फाउंडेशन व चिकित्सकों का मानना है कि समय रहते तंबाकू और निकोटीन उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण तथा जागरूकता अभियान चलाकर इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2026 के लिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम “निकोटीन और तंबाकू की लत के आकर्षण का पर्दाफाश: निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला” निर्धारित की है।
सवाई मानसिंह चिकित्सालय जयपुर के कान-नाक-गला विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ.पवन सिंघल ने बताया कि इस वर्ष की थीम का उद्देश्य लोगों को तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करना, तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करना तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि युवाओं और बच्चों को आकर्षित करने के लिए तंबाकू कंपनियां विभिन्न रणनीतियों का उपयोग करती हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसी रणनीतियों का पर्दाफाश कर बच्चों और किशोरों को सुरक्षित रखना है। साथ ही ई-सिगरेट जैसे आधुनिक निकोटीन उत्पादों के खतरों के प्रति भी युवाओं को जागरूक किया जा रहा है।
डॉ. सिंघल ने बताया कि तंबाकू कंपनियां कई बार इन उत्पादों को “फैशन” और “आधुनिक जीवनशैली” के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे युवा प्रभावित होकर इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। ऐसे भ्रम को दूर करना भी अभियान का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
उन्होंने तंबाकू नियंत्रण के लिए सख्त कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन और थूकने पर प्रतिबंध, व्यापक जनजागरूकता अभियान, स्कूल पाठ्यक्रम में तंबाकू के दुष्प्रभावों को शामिल करने, तंबाकू विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध तथा सामुदायिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. पवन सिंघल के अनुसार ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों से होने वाली बीमारियों के कारण प्रतिवर्ष 77 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। वहीं प्रदेश में प्रतिदिन 300 से अधिक बच्चे तथा देशभर में करीब 5500 बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू कर रहे हैं।
तंबाकू मुंह, जीभ, गले और पेट के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अतिरिक्त यह उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, सीओपीडी, एम्फीसेमा और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण बनता है।
राजस्थान में वर्तमान समय में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। इनमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं जबकि 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
दुनियाभर के युवा राजस्थान से ले रहे तंबाकू नियंत्रण की शिक्षा
तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में राजस्थान की उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, वाशिंगटन ने वर्ष 2025 में डॉ.पवन सिंघल को मेंटर नियुक्त किया था। जिसके बाद से निरंतर उनके मार्गदर्शन में भारत सहित विभिन्न देशों के युवा तंबाकू नियंत्रण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
डा.पवन सिंघल ने बताया कि जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की और से भारत से चुने गए प्रतिनिधियों को राजस्थान में तंबाकू नियंत्रण पर शिक्षण कराया जाता है। इसके साथ ही प्रतिनिधियों को प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर भेजकर तंबाकू की वर्तमान स्थिति और उसके उपयोग सहित अन्य जानकारियां प्रदान कराई जाती है।
तंबाकू नियंत्रण के लिए सख्त कानूनी और सामाजिक कदम उठाना भी बेहद जरूरी
सुखम फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ. सोमिल रस्तौगी ने कहा कि तंबाकू नियंत्रण के लिए केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि सख्त कानूनी और सामाजिक कदम उठाना भी बेहद जरूरी है। इनकी रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण के लिए तंबाकू उत्पादों की बिक्री और प्रचार-प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कड़े कानून लागू किए जाएं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां बच्चों और युवाओं की संख्या अधिक है। सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू एवं धूम्रपान उत्पादों के सेवन के बाद थूकने या इनके अवशेष फेंकने पर प्रतिबंध लगाते हुए जुर्माने का प्रावधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों और अभिभावकों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा स्कूलों के पाठ्यक्रम में तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान संबंधी जानकारी को शामिल किया जाए। डॉ. रस्तोगी ने तंबाकू उद्योग के सभी प्रकार के विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और सामुदायिक स्तर पर संगठनों, नागरिकों एवं सरकारी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को तंबाकू उद्योग के प्रभाव से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि उन्हें एक स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने राजस्थान सरकार के तंबाकू नियंत्रण प्रयासों की सराहना करते हुए वर्ष 2026 का “वर्ल्ड नो टोबैको डे अवॉर्ड” भी प्रदान किया है।



















