जयपुर। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी गुरुवार को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के पुण्यकारी संयोग में पूजा-अर्चना की गई। कल-कारखानों, गैराज, कंपनियों, हार्डवेयर प्रतिष्ठानों, मोटर वाहन सहित निर्माण और शिल्प से जुड़े संस्थानों में मशीनों एवं उपकरणों की सफाई कर विधिवत पूजन किया गया।
कई स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा प्रतिष्ठित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मुख्य आयोजन विश्वकर्मा रोड नंबर पर स्थित विश्वकर्मा मंदिर में कारपेंटर एसोसिएशन विकास समिति की ओर से हुआ। आयोजन से जुड़े कैलाश जांगिड़ ने बताया कि सुबह भगवान विश्वकर्मा का अभिषेक कर हवन किया गया। जांगिड़ समाज के लोगों ने महाआरती उतारी।
विश्वकर्मा वेलफेयर सोसायटी, मालवीय नगर की ओर से जगतपुरा रोड डाक कॉलोनी स्थित विश्वकर्मा मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की झांकी सजाई गई। अखिल भारतीय विश्वकर्मा पांचाल महासभा जयपुर की ओर से ब्रह्मपुरी कागदीवाड़ा स्थित श्री वैष्णोदेवी मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा देवताओं के वास्तुकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता माने जाते हैं। कलाकार, बुनकर, शिल्पकार, इंजीनियर, कारीगर और व्यापारी वर्ग के लिए विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है।
पूजा के दौरान मशीनों, औजारों और कार्यस्थल की साफ-सफाई कर उनकी विधिवत पूजा की गई। धार्मिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के भवन, नगर और अस्त्र-शस्त्र के निर्माण से जोड़ा गया है। विश्वकर्मा पूजा श्रम, सृजन और निर्माण-कौशल के सम्मान का पर्व माना जाता है।



















