जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई: रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ एसीबी ने पेश किया 17 हजार 500 पन्नों का चालान

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जयपुर। जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के बहुचर्चित मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के विरुद्ध एसीबी न्यायालय संख्या-1, जयपुर में चालान पेश किया है। करीब 17,500 पृष्ठों का विस्तृत चालान गुरुवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

एसीबी के महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) की जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्रों के आधार पर लगभग 979.27 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए गए। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ निविदाओं में नियमों के विपरीत शर्तें जोड़ी गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रतिकूल असर पड़ा। इससे राज्य को बड़े वित्तीय नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए गए।

एसीबी इससे पहले दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, निरिल कुमार, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी.के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी और मुकेश पाठक सहित कुल 10 आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र न्यायालय में पेश कर चुकी है। इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी, संजय बड़ाया तथा अन्य व्यक्तियों के संबंध में अनुसंधान अभी जारी है।

एसीबी के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि तत्कालीन मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव पीएचईडी सुबोध अग्रवाल, विभागीय अधिकारियों, संवेदकों और निजी व्यक्ति संजय बड़ाया समेत अन्य लोगों के बीच मिलीभगत कर 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में नियमों के विरुद्ध साइट विजिट प्रमाण-पत्र को अनिवार्य बनाया गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि इससे बोलीदाताओं की पहचान पहले ही उजागर हो जाती थी, जिसके कारण टेंडर पुलिंग को बढ़ावा मिला और 30 से 40 प्रतिशत तक असामान्य रूप से अधिक टेंडर प्रीमियम प्राप्त हुए। एसआईटी जांच में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये मूल्य के टेंडरों में पद के दुरुपयोग और व्यापक भ्रष्टाचार के तथ्य प्रमाणित पाए गए हैं।

एसीबी ने स्पष्ट किया है कि पूर्व मंत्री महेश जोशी, संजय बड़ाया एवं अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध अनुसंधान जारी है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रकरण की जांच उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में गठित एसआईटी द्वारा की गई। टीम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु कुलदीप, भूपेंद्र सिंह और महावीर प्रसाद शर्मा शामिल रहे। मामले के अनुसंधान अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महावीर प्रसाद शर्मा ने चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।

एसीबी ने कहा कि वह इस महत्वपूर्ण प्रकरण में निष्पक्ष, गहन और प्रभावी जांच करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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