आमेर का त्रिनेत्र सिद्धिविनायक: साल में कुछ खास मौकों पर ही खुलते हैं पट

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Amer’s Trinetra Siddhivinayak
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जयपुर। आमेर की ऐतिहासिक धरोहरों के बीच भगवान गणेश का करीब सवा 400 साल पुराना त्रिनेत्र सिद्धिविनायक मंदिर आज भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। मुख्य आमेर किला रोड पर 11 सीढ़ियां ऊपर स्थित इस मंदिर में भगवान गणेश त्रिनेत्र और दाहिनी सूंड वाले सिद्धिविनायक स्वरूप में विराजमान हैं। मंदिर का निर्माण मिर्जा राजा मानसिंह के समय हुआ बताया जाता है। गणेश चतुर्थी को देखते हुए इन दिनों मंदिर में विशेष शृंगार, सेवा और पूजा-अर्चना की जा रही है।

मंदिर के महंत प्रेमचंद शर्मा के अनुसार मिर्जा राजा मानसिंह धार्मिक प्रवृत्ति के थे और उनके समय में आमेर में कई मंदिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया गया। इसी दौर में इस मंदिर का निर्माण हिंदू स्थापत्य शैली में चार खंभों और दो छतरियों के साथ कराया गया था। बाद में पुजारी परिवार ने इसका विस्तार किया और मंदिर वर्तमान स्वरूप में आया।

दाहिनी सूंड वाले गणपति विशेष

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता भगवान गणेश की दाहिनी ओर मुड़ी सूंड है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दाहिनी सूंड वाले गणपति को सिद्धि प्रदाता माना जाता है। वहीं त्रिनेत्र स्वरूप को भगवान शिव के तत्व से जोड़ा जाता है। गणेश सहस्रनाम में गणपति के स्वरूप को शिव तत्व से जोड़कर देखने की धार्मिक परंपरा भी बताई जाती है।

साल में विशेष अवसरों पर खुलते हैं पट

मंदिर की अनूठी परंपरा के अनुसार इसके पट नियमित रूप से नहीं खुलते। पुष्य नक्षत्र और गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष दर्शन होते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान सिंजारा, गणेश चतुर्थी और ऋषि पंचमी इन तीन दिनों में श्रद्धालु दर्शन कर पाते हैं। इन अवसरों पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

रिद्धि-सिद्धि के साथ राम दरबार और शिव परिवार

मंदिर में भगवान गणेश के साथ माता रिद्धि-सिद्धि विराजमान हैं। परिसर में दो हाथियों की प्रतिमाएं बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके अलावा राम दरबार, शिव परिवार और महंत परिवार के आराध्य देवी-देवताओं के चित्र भी स्थापित हैं।

श्रद्धालु डॉ. चंद्रभान के अनुसार वे पहली बार 2022 में गणेश चतुर्थी पर मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने मनोकामना रखी और उनके अनुसार 2023 में मनोकामना पूरी हुई। इसके बाद से वे हर महीने पुष्य नक्षत्र पर सेवा-पूजा के लिए आते हैं। वहीं पीढ़ियों से मंदिर में दर्शन करने वाले लल्लू प्रसाद सैनी इसे चमत्कारी गणपति का दरबार बताते हैं। उनके अनुसार गणेश चतुर्थी पर यहां मेले जैसा माहौल रहता है और दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

आस्था और स्थापत्य की विरासत कायम

सवा 400 साल का सफर तय कर चुका यह मंदिर आज भी अपनी धार्मिक और स्थापत्य विरासत को संजोए हुए है। पूरे साल नियमित दर्शन नहीं होने के बावजूद मंदिर में भगवान की सेवा-पूजा निरंतर जारी रहती है। आमेर की ऐतिहासिक पहाड़ियों के बीच स्थित यह दाहिनी सूंड वाले सिद्धिविनायक का दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था और मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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