12 साल से फरार 50 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार

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Criminal Absconding for 12 Years Arrested
Criminal Absconding for 12 Years Arrested

जयपुर। सीआईडी (सीबी) पुलिस मुख्यालय की स्पेशल टीम ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 वर्षों से फरार चल रहे 50 हजार रुपए के इनामी अपराधी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी अंतरराज्यीय ट्रैक्टर वाहन तस्करी सिंडिकेट का सरगना बताया जा रहा है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश और अतिरिक्त महानिदेशक (अपराध) विपिन कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। आरोपी आबिद मेवाती पुत्र खुशीला, निवासी जंगली का नगला, थाना बरसाना, जिला मथुरा को वहीं से दस्तयाब किया गया।

महानिरीक्षक पुलिस परम ज्योति के सुपरविजन में उपनिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में गठित टीम को सूचना मिली कि आरोपी मथुरा में एक शादी समारोह में शामिल होने आने वाला है। इस पर टीम ने स्थानीय पुलिस और बूंदी पुलिस की मदद से कुसुम वाटिका में घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया।

अतिरिक्त महानिदेशक (अपराध) विपिन कुमार पाण्डेय ने बताया कि कार्रवाई के दौरान उग्र भीड़ ने आरोपी को छुड़ाने की कोशिश भी की, लेकिन टीम ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए आरोपी को सुरक्षित हिरासत में लेकर पुलिस थाना हाईवे, मथुरा पहुंचाया, जहां से उसे बूंदी पुलिस को सुपुर्द किया गया।

जांच में सामने आया कि आरोपी अपने गिरोह के साथ मिलकर अलग-अलग राज्यों में ट्रैक्टर लोन पर खरीदता था, फिर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें ट्रकों में लोड कर उत्तर प्रदेश के छाता क्षेत्र में भेज देता था। वहां इन वाहनों की अवैध खरीद-फरोख्त कर भारी मुनाफा कमाया जाता था।

बताया जा रहा है कि आरोपी वर्ष 2012 से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था और अब तक 1500 से 2000 से अधिक ट्रैक्टरों की अवैध बिक्री कर चुका है। प्रत्येक वाहन पर करीब 2 लाख रुपए तक का मुनाफा कमाया जाता था।

आरोपी के खिलाफ राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और धोखाधड़ी सहित कई संगीन मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था।

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक शैलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल बृजेश कुमार, करणी सिंह, रविन्द्र सिंह, कृष्णगोपाल, अरुण कुमार, कुलदीप और कांस्टेबल नरेश कुमार की विशेष भूमिका रही। साथ ही एएसआई शंकर दयाल शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों का तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।

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