जयपुर। पावन तीर्थ स्थल श्री अमरापुर स्थान जयपुर द्वारा आयोजित 15 दिवसीय श्री अमरापुर बाल संस्कार शिविर में इन दिनों उत्साह और उमंग का वातावरण छाया हुआ है। शिविर में नन्हे-मुन्ने बच्चे प्रतिदिन पहुंचकर न केवल संस्कारों की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
शनिवार को शिविर में विशेष कला गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने सदगुरु टेऊँराम महाराज जी के चित्र में रंग भरकर उसे जीवंत रूप प्रदान किया। लगभग 90 बच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी कला, कल्पना और रचनात्मकता का सुंदर प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर बच्चों को संस्कार, भक्ति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक चित्रकारी कर आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक मनमोहक बना दिया।
शिविर में संत एवं शिक्षक जितेन्द्र दाधीच के मार्गदर्शन में बच्चों को सरल और सुगम तरीके से मंत्रों एवं श्लोकों का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप बच्चे अब भोजन मंत्र, स्नान मंत्र सहित गणेश, कृष्ण एवं शिव से जुड़े मंत्रों का उच्चारण सहजता से करने लगे हैं।
बच्चों में संस्कारों के प्रति बढ़ती रुचि को देखकर अभिभावक भी प्रसन्नता और गर्व का अनुभव कर रहे हैं।
शिविर के अंतर्गत रविवार को “माता-पिता प्रथम गुरु होते हैं” विषय पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में स्वामी मोहन प्रकाश महाराज ने बताया कि बच्चे अपने माता-पिता के नाम के साथ उनके मार्गदर्शन, संस्कार एवं सानिध्य को निबंध के माध्यम से अभिव्यक्त करेंगे।
आयोजन का उद्देश्य बच्चों में परिवार के प्रति सम्मान, संस्कार और कृतज्ञता की भावना विकसित करना है। शिविर के आयोजन से बच्चों में न केवल शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास हो रहा है, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का भी संचार हो रहा है।



















